एलडीए की विकसित वीआईपी कॉलोनी विपुलखंड में प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री खुलेआम तबेला चला रहे हैं। यह तब है जब शहरी क्षेत्र में डेयरी संचालन पर हाईकोर्ट की रोक लगी हुई है। अंबेडकर पार्क से सीएमएस के लिए जाने वाली मुख्य सड़क पर यह तबेला पूरी दबंगई के साथ चल रहा है।
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तबेला
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, एलडीए और नगर निगम के अधिकारियों की जानकारी में होने केबाद अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विपुलखंड में भूखंड 1/8 पर चल रहे इस तबेले में आधा दर्जन से अधिक गाय-भैंसें हैं। एलडीए के रिकॉर्ड में बी-टाइप (करीब 6,000 वर्गफुट आकार) का यह भूखंड किसी सहारनपुर के अमित कुमार पुत्र धर्म सिंह के नाम पर दर्ज है।
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तबेला
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वहीं, तबेला देखने वालों ने खुद स्वीकारा कि कैबिनेट मंत्री ने यह भूखंड खरीदा हुआ है। उनकी ही गाय-भैंसें यहां रखी गई हैं। इनका दूध भी उन्हीं के यहां भेजा जाता है। पूर्व में की शिकायतों के बाद जांच करने गए एलडीए और नगर निगम के स्टाफ ने भी इसकी पुष्टि की। इनका भी कहना है कि कैबिनेट मंत्री की जमीन पर गाय-भैंसें पाली जा रही हैं।
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तबेला
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कुछ दिन पहले ही एलडीए की टीम यहां जांच करने गई थी। भूखंड से सटे भवन में आवासीय में कॉमर्शियल उपयोग मिलने पर कार्रवाई की गई थी। उसी समय टीम ने इस भूखंड पर हुए निर्माण और बने तबेले की छानबीन की।
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तबेला
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मौजूद कर्मचारियों ने कैबिनेट मंत्री की गाय-भैंसें और जमीन होने की धमकी देते हुए वहां से जाने को कह दिया था। इसके बाद कार्रवाई करने की जगह मामले को दबा दिया गया।
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डेमो
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पड़ोस में ही रहने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने इस तबेले की शिकायत नगर निगम में की थी। मुख्य सड़क की सर्विस लेन पर भूसा गिराने से आसपास के घरों में समस्या हो रही थी। गोबर की बदबू भी लोगों को परेशान किए है। इसके बाद आनन-फानन टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन कैबिनेट मंत्री का नाम पता चलते ही बिना कार्रवाई किए लौट आई।
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डेमो
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हाईकोर्ट के अलग-अलग आदेश और नगर निगम की नियमावली के मुताबिक शहरी सीमा में केवल दो गाय रखने की अनुमति है। इसके अलावा उनके बच्चे ही साथ में रखे जा सकते हैं। यह अनुमति भी उस समय होगी जब गंदगी का उचित निस्तारण पशुपालक द्वारा सुनिश्चित किया जाए।
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तबेला
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विपुलखंड की आरडब्ल्यूए (रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन) के अध्यक्ष किशोर शाह का कहना है कि जिस कॉलोनी में अधिकतर वीआईपी ही रहते हैं, वहां एक आवासीय भूखंड पर खुलेआम तबेला चल रहा है। इससे दूसरे लोगों को भी समस्या होती है। मुख्य सड़क पर तबेला होने के बाद भी इस पर कार्रवाई न होना चौंकाने वाला है।
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हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक आवासीय इलाके में तबेला चलने के लिए नगर निगम के अलावा जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से जिम्मेदार है। तबेला हटवाने की जिम्मेदारी प्रमुख रूप से नगर निगम की है। वहीं, आवासीय भूखंड पर तबेला चलने और अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी एलडीए की है।
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डेमो
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'निश्चित रूप से आवासीय इलाके में तबेला और अवैध डेयरी हटवाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, जिसमें सहयोग जिला प्रशासन और पुलिस का लिया जाता है। विपुलखंड के इस तबेले की कोई शिकायत हमें अभी तक नहीं मिली है। अब इसे दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।' - डॉ. अरविंद कुमार राव, मुख्य चिकित्साधिकारी, नगर निगम
'आवासीय भूखंड पर तबेला चलाना गलत है। दूसरे वहां पक्का निर्माण किस आधार पर कर लिया गया। इसके लिए नक्शा स्वीकृत कराया गया है कि नहीं? इसकी जांच करानी होगी। तबेला नगर निगम को हटवाना होगा। हम वहां हुए अवैध निर्माण की जांच करा लेंगे।' - भूपेंद्र बीर सिंह, प्रभारी प्रवर्तन-1, एलडीए