पुराने लोग सालों तक जिस बेलीगारद को देख शाम को उसके सामने से गुजरने में भी हिचकते रहे, आज वही रेजीडेंसी शहर की उस विरासत में शुमार है जहां घूमना 150 साल के इतिहास को जीने के बराबर है। कैसरबाग जाते समय शहीद स्मारक के सामने ये विशालकाय परिसर आज भी घूमते समय घड़ी की सुईयों को थाम देता है। चंद घंटों का समय लेकर आए शौकीन यहां सुबह से शाम तक कब बिता देते हैं, उन्हें पता नहीं चलता। भारतीय और विदेशी पर्यटक अलग-अलग टिकट रेट चुकाकर भले ही आते हैं, लेकिन जब जाते हैं कैमरे की सारी जगह भरकर।