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ये हैं कुछ बेहतरीन स्थल जो दिन भर रहते हैं गुलजार, यहां सैर नहीं की तो क्या घूमे...

Sat, 21 Apr 2018 04:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेंमो
जायके के साथ सैर-सपाटे के लिए भी लखनऊ में में ढेरों स्पॉट्स हैं। लखनऊ के इतिहास की दास्तां बताने वाली धरोहरों के साथ ऐसे ठिकाने भी हैं जो दिनभर गुलजार रहते हैं। तमाम ठौर की सैर की यादें झरोखे में ऐसे बस जाती हैं कि भुलाए नहीं भूलती। आइए जानें इनके बारें में। 
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- फोटो : डेंमो
पुराने लखनऊ में मूसाबाग के अलावा शहरी कंक्रीट के जंगल के बीच लगभग 5 हजार से अधिक एकड़ में फैले कुकरैल के कुदरती जंगल में ईको टूरिज्म प्रवेश करते ही दिख जाता है। आंखों को सुकून देने वाली हरियाली की जो बेल्ट दिखनी शुरू होती है, वह जंगल में घुसते-घुसते और घनी होती चली जाता है। कुकरैल वन क्षेत्र को लखनऊ के लोग दशकों तक एक बड़े पिकनिक स्पॉट के रूप में जानते रहे।
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- फोटो : डेंमो
खासियत
- शहर से दूर इस पिकनिक स्पॉट की 5 हजार एकड़ की विरासत भी अद्भुत है। यहां पेड़ों की सैकड़ों किस्मों के अलावा नैचुरल बर्ड साइट भी है। इसमें सैकड़ों किस्म की दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों की साइटिंग की जा सकती है। यही नहीं अपने आप में समृद्ध घड़ियाल-कछुआ पुनर्वास केंद्र का आकर्षण भी कुछ कम नहीं है।
- ट्रांसगोमती में 7-8 किमी की दूरी तय करते ही शहर के कोलाहल से दूर और परिंदों की चहचहाहट के बीच दिन बिताने को नेचर लवर्स के लिए यह सबसे उम्दा जगह है। वन विभाग भी यहां कभी मोबीवॉक, बर्ड वाचिंग जैसे इवेंट करवाता ही रहता है। इसे एक बेहतर शूटिंग हब के रूप में भी जाना जाता है।
- नवाबगंज पक्षी विहार शहर के बाहर पड़ता है। ऐसे में कुदरत के करीब एक कोने में नैचुरली जंगल के साथ फन जोन शहरियों की वीकएंड आउटिंग का एक अच्छा विकल्प है।
 

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डेमो - फोटो : डेंमो
देश में कहने-सुनने में जितना झुमरी तलैया शब्द चर्चित है, उतना ही लखनऊ की ‘भूलभुलैया’ का क्रेज है। इस पर फिल्म तक बन चुकी है। गोमती किनारे हुसैनाबाद में यह ऐतिहासिक भूलभुलैया बड़ा इमामबाड़ा का ही हिस्सा है। यह ऐसा स्थान है जहां आप गाइड के साथ करीने से नहीं चले तो बस भटकते ही रहिए। 18वीं शताब्दी के आखिर में नवाबों के काल की यह इमारत इतनी खास है कि आज भी लखनऊ आने वाला पर्यटक यहां बिना घूमे नहीं जा सकता। भूलभुलैया की ता-जिंदगी भर की यादें लोग सहेज कर ले जाते हैं।
 
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- फोटो : डेंमो
खासियत
- इसी परिसर में ऐतिहासिक भूलभुलैया है जो गुम करने को दशकों से लखनवियों के किस्सों में शुमार है तो बेगम की बावली भी है। जहां गोमती से पानी आया करता था। यही नहीं मुख्य हाल में सदियों पुरानी पहचानें अपने आप में अनोखी हैं।
- यहां आपको विदेशी मेहमान भूलभुलैया में भटकते या सेल्फी लेते मिल ही जाएंगे। आलम यह है कि लखनऊ में किसी फिल्म की शूटिंग हो और बड़ा इमामबाड़ा न दिखे तो शूटिंग निर्देशक को अधूरी ही लगती है।
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- फोटो : डेंमो
पुराने लोग सालों तक जिस बेलीगारद को देख शाम को उसके सामने से गुजरने में भी हिचकते रहे, आज वही रेजीडेंसी शहर की उस विरासत में शुमार है जहां घूमना 150 साल के इतिहास को जीने के बराबर है। कैसरबाग जाते समय शहीद स्मारक के सामने ये विशालकाय परिसर आज भी घूमते समय घड़ी की सुईयों को थाम देता है। चंद घंटों का समय लेकर आए शौकीन यहां सुबह से शाम तक कब बिता देते हैं, उन्हें पता नहीं चलता। भारतीय और विदेशी पर्यटक अलग-अलग टिकट रेट चुकाकर भले ही आते हैं, लेकिन जब जाते हैं कैमरे की सारी जगह भरकर।
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खासियत  
- 1857 के गदर की अनमोल निशानी रेजीडेंसी में अंग्रेज अफसरों के निवास के अलावा उनके तमाम पहलुओं का यहां दीदार होता है। अंदर जाने पर एकबारगी अहसास होता है कि कैसे यहां गदर में आजादी के दीवाने और अंग्रेजी फौज में आमना-सामना हुआ होगा।
- यहां तोप और बंदूक के गोलों के निशान गिनने शुरू किए तो दिन बीत जाता है। लेकिन युवाओं के बीच ये सेल्फी प्वाइंट से कम नहीं है। यही कारण है कि लखनऊ में फिल्माई हर फिल्म मे रेजीडेंसी के तमाम सीन दिखते जरूर हैं। शौकिया और कलात्मक फोटोग्राफी के दीवाने यहां अपनी तीसरी आंख के कमाल को बखूबी दिखाते हैं।
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