दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित का उत्तर प्रदेश की सियायत से भी गहरा नाता रहा। कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित को प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा भी बनाया था। यह बात दीगर रही कि इस चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
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- फोटो : amar ujala
शीला दीक्षित की ससुराल उन्नाव के ऊगू में थी। वह प्रदेश के प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के कामकाज में हाथ बंटाया करती थीं। इसी दौरान इंदिरा गांधी से उनकी मुलाकात हुई।
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इंदिरा गांधी ने उन्हें युवक कांग्रेस के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी और यहीं से उनका सियासी सफर शुरू हुआ। हालांकि सियायत में उनकी लंबी पारी दिल्ली में ही रही, लेकिन यूपी से उनका लगातार नाता बना रहा।
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वह संयुक्त राष्ट्र संघ की महिला समिति में देश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी थीं। उन्होंने 1990-91 में कांग्रेस की तरफ से चले आंदोलनों में भी यूपी में भागीदारी की।
गिरफ्तार होकर 23 दिन जेल में भी रहीं। पर, 1995 के बाद वह प्रदेश में राजनीतिक रूप से बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं रहीं। इसकी एक वजह उनकी दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी रही। अलबत्ता वह अपनी ससुराल उन्नाव लगातार आया-जाया करती थीं।