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बेसहारा और बेजुबानों के मसीहा हैं ये ऑफिसर, सैलरी का 80-90 प्रतिशत खर्च कर देते हैं इनकी देखभाल पर

Thu, 05 Jul 2018 04:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पशुप्रेमी प्रदीप - फोटो : amarujala
आरडीएसओ में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी और पशुप्रेमी प्रदीप पात्रा को लखनऊ के लोग आवारा, बेसहारा और बेजुबानों के मसीहा के रूप में जानते हैं। इनका ज्यादातर समय आवारा, बेसहारा जानवरों की सेवा में ही गुजरता है। शहर के किसी भी कोने में चोट खाये या बीमार जानवरों के अलावा घर-मकानों में निकलने वाले सांप-अजगर जैसे जीवों से भी प्रदीप रूबरू होते हैं। लोग बताते हैं कि वह अपनी सैलरी का 80-90 प्रतिशत हिस्सा हर महीने इन बेजुबानों पर ही खर्च कर देते हैं। 
 
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पशुप्रेमी प्रदीप - फोटो : amarujala
गर्मियों में घोड़ों के लिए पॉश इलाकों व बाजारों में पानी की विशालकाय नांद का इंतजाम करने वाले प्रदीप इतवार को साथियों के साथ शहर में यहां-वहां ओवरलोड घोड़ा गाड़ियों और उन घोड़ों की पड़ताल करते दिख जाते हैं। हां, इस नांद के लिए वो साथियों से सहयोग लेते हैं और जहां इसकी व्यवस्था करते हैं, वहां किसी को रोज उसे भरवाने की जिम्मेदारी भी देकर आते हैं। 
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पशुप्रेमी प्रदीप - फोटो : amarujala
बेजुबानों पर होने वाले अत्याचारों से आजिज आकर प्रदीप पिछले करीब दो दशक से उनकी सेवा में जुटे हैं। आज आलम यह है कि  उनके साथ 40-50 से अधिक पशुप्रेमियों का काफिला जुड़ गया हैं, जो सूचना मिलते ही शहर के किसी भी कोने में पहुंचकर बेजुबानों की मदद करते हैं। प्रदीप कहते हैं कि हम और आप तो बोल सकते हैं, लेकिन ये बेजुबान नहीं बोल सकते। उन्हें क्या और कहां तकलीफ है यह आपको ही महसूस करनी होती है।

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पशुप्रेमी प्रदीप - फोटो : amarujala
प्रदीप बताते हैं कि वो कोई डॉक्टर नहीं है, लेकिन चोट खाए जानवरों की मरहम पट्टी भी करता हूं। उसके बाद जरूरी हुआ तो नगर निगम या संबंधित महकमे को सूचित कर इलाज की उचित व्यवस्था करता हूं। लोगों से भी कहता हूं कि आप भी ऐसा करके बेजुबान की मदद कर सकते हैं। 
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पशुप्रेमी प्रदीप - फोटो : amarujala
जानवरों और खतरनाक जीवों को पकड़ने व उनकी मदद करने के दौरान कई बार चोट भी खा जाते है, लेकिन पशुओं के प्रति कभी कम नहीं हुआ। शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता हो जब किसी न किसी बहाने 4-6 बेसहारा, बेजुबानों तक उनकी मदद न पहुंचती हो।
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