प्रॉक्टर प्रो. विनोद सिंह का कहना है कि उन्होंने परिसर के माहौल के संबंध में सुबह ही पुलिस को जानकारी दी थी। अवांछित तत्वों के गेट नंबर एक पर भूख हड़ताल के बारे में बताया गया था। ये लोग जबरदस्ती परिसर में बैठे हुए थे। इसके बावजूद उन्हें उठाया नहीं गया। उनके समर्थन में बाहरी लोग जुटे। घटना के समय पुलिस परिसर में मौजूद थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। घटना के बाद भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को पुलिस ने उठाया।
मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री को ट्वीट कर दी जानकारी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस पर सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए ट्वीट कर घटना की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप-मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को दी। इसके बावजूद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया। घटना के बाद डीजीपी ओमप्रकाश, एसपी टीजी हरेंद्र कुमार, सीओ अनुराग सिंह को भी फोन किया गया।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों को ले जाती पुलिस।
विश्वविद्यालय में अनुशासनात्मक मामलों में करीब 25 विद्यार्थियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। इन अभ्यर्थियों की प्रवेश परीक्षा का परिणाम भी जारी नहीं किया गया है। पिछले साल सीएम योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाने वाली पूजा शुक्ला और गौरव त्रिपाठी इसके विरोध में सोमवार से भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। बुधवार को गौरव बेहोश हो गया।
भूख हड़ताल पर बैठे समर्थकों ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन की ओर से उसे देखने कोई नहीं आया। एंबुलेंस न आने पर समर्थक आक्रोशित हो उठे। इसके बाद पूरी घटना हुई। हालांकि पूजा शुक्ला और अन्य समर्थकों ने मारपीट करने वालों से किसी प्रकार का संबंध या फिर उन्हें पहचानने से इन्कार किया।
मामले पर क्षेत्राधिकारी महानगर अनुराग सिंह का कहना है, ‘मुख्य नियंता की तहरीर पर तीन नामजद और दर्जनों अज्ञात युवकों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, मारपीट, बलवा और सेवन क्रिमिनल लॉ एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने दो को मौके से ही पकड़ लिया था। एक अन्य आरोपी बॉक्सर को पुलिस ने देर शाम को गिरफ्तार किया। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।’