रविवार दोपहर आए भूकंप के झटकों की दहशत के बीच शाम ढलते ही अफवाहों के बवंडर आने शुरू हो गए। शुरुआत चांद के उल्टा निकल आने की अफवाह से हुई। शाम होते ही टीवी चैनलों के साथ सोशल मीडिया पर उल्टे निकले चांद, उसकी पोजीशन को लेकर गहमागहमी का दौर शुरू हो गया। लोगों के बीच अफवाह चली के चांद कुछ अजब तरीके से निकल आया है।
विज्ञापन
न चांद हुआ टेढ़ा और न पानी हुआ जहर, अफवाहें ही थीं
2 of 5
इसके बाद खदरा, पुराने लखनऊ के इलाकों में रात को सिलबट्टों में धार्मिक चिह्नों को देखे जाने की अफवाह उड़ गई। लोग इसके सुनते ही उन्हें धो पोंछकर घर के पूजा घरों-इबादतगाहों में ले जाकर देखने लगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं रहा। लोग अगले 24-48 घंटों में पानी के कड़वे होने की अफवाह से भी हलकान रहे।
विज्ञापन
न चांद हुआ टेढ़ा और न पानी हुआ जहर, अफवाहें ही थीं
3 of 5
देर रात तक लोग अफवाहों को लेकर पड़ोसियों और अखबारों के दफ्तरों में फोन कर सच जानते रहे। इंदिरागांधी नक्षत्रशाला के एजुकेटर सुमित ने बताया कि उनके पास भी कई लोगों के चांद के उल्टा होने केफोन आए, लेकिन सारे ग्रह अपनी जगह पर हैं। चांद की पोजिशन उल्टा होने का मतलब है कि पृथ्वी का रोटेशन बिगड़ना ये एकदम असंभव है।
न चांद हुआ टेढ़ा और न पानी हुआ जहर, अफवाहें ही थीं
4 of 5
‘चांद उल्टा निकलने की सूचना बिल्कुल अफवाह है। धरती पर भूकंप आए और चांद उल्टा हो जाए ऐसा नहीं है। ये कोरी अफवाह है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। धरती भी अपनी जगह पर है, चांद भी अपनी जगह पर। चांद आज भी पश्चिम से उदय हुआ है। लोग ऐसी बातों अफवाहों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें।’ (अनिल यादव, खगोलविद, यूपी स्टे प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर, इंदिरागांधी नक्षत्रशाला)
न चांद हुआ टेढ़ा और न पानी हुआ जहर, अफवाहें ही थीं
5 of 5
‘न तो चांद ही उल्टा निकला और न ही पानी जहरीला होने जा रहा है। पत्थर का सिलबट्टा भी नहीं फटने जा रहा है। ये सब कोरी अफवाहें हैं। लोग अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद चर्चा में बने रहने के लिये झूठी बातें प्रसारित करवा देते हैं। घबराने की जरूरत नहीं है।’ (राजकमल श्रीवास्तव, संयोजक, जिला विज्ञान क्लब।)