घड़ी में दोपहर के करीब एक बज रहे थे। स्थान चूली गांव, जहां पर बेकाबू कार ने एक किशोरी व तीन युवतियों की जिंदगी लील ली थी। घटनास्थल का नजारा दिल दहलाने वाला था। लड़कियों की जूतियां, चप्पल पड़े थे। डिवाइडर पर खून लगा था। सड़क पर खून बिखरा पड़ा था। कार के सड़क पर 500 मीटर की दूरी तक रगड़ने के धब्बे जाहिर कर रहे थे कि मौत किस तरह भयावह होकर सामने आई। आसपास के लोग बताते हैं कि कार की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटा थी, जिसने पलक झपकते चार परिवारों की खुशियों को गम में तब्दील कर दिया।
कोडर और चूली गांव के बीच की करीब एक किमी दूरी है। चूली गांव में भंडारा कार्यक्रम था। चूली गांव जाने के लिए वैसे तो सर्विस रोड बनी है, लेकिन रविवार शाम को नौ किशोरियां व युवतियां निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे से होकर घर लौट रही थीं। कार प्रयागराज से रायबरेली की तरफ आ रही थी। घटनास्थल का नजारा साफ बयां कर रहा था कि यह हादसा कार चालक की लापरवाही से हुआ।