कई दशकों से हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनी बीकेटी की ऐतिहासिक रामलीला का सोमवार देर शाम भव्य समापन हुआ। इस रामलीला की खसियात यह है कि इसमें रामकथा का मंचन ज्यादातर मुस्लिम कलाकारों के द्वारा किया जाता है। बीकेटी की ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत 1972 में ग्राम पंचायत रूदही के तत्कालीन प्रधान मैकूलाल यादव और बीकेटी कस्बे के प्रसिद्व चिकित्सक डॉ मुजफ्फर हुसैन के द्वारा की गई थी।
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रामलीला
इसके बाद मैकूलाल यादव के पुत्र विदेश पाल यादव व मुजफ्फर अली के पुत्र शहजाद अहमद ने इस परंपरा को आगे बढाया। 2010 में नगर पंचायत बीकेटी के गठन के बाद इस रामलीला का आयोजन नगर पंचायत सुमन रावत व उनके पति गनेश रावत करा रहे हैं। रामलीला का शुभारंभ 30 सिंतबर को शिव बारात के साथ हुआ था।
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शिव बारात में हाथी, उंट व दर्जनों वाहन शामिल हुए। एक अक्तूबर को धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। सोमवार को राम-रावण युद्व के बाद देर शाम 40 फुट के पुतले के दहन के साथ इस ऐतिहासिक रामलीला का समापन हो गया। इस रामलीला पर कई लघु फिल्मों का निर्माण देश व विदेश में हो चुका है।
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रामलीला को 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के द्वारा राष्ट्रीय एकता के लिए पुरुस्कृत भी किया जा चुका है। इस रामलीला में साबिर अली खान 1975 से मंचन की जिम्मेदारी संभाल रहे है। इनके पुत्र सलमान राम, अरबाज लक्ष्मण, शेर खान जनक, नाती साहिल बचपन के राम की भूमिका निभाते है।
रावण की भूमिका कई सालों तक साबिर अली के भाई नसीम खान के द्वारा निभाई गई। लेकिन तीन साल पहले बीमारी के चलते अब रावण की भूमिका पवन गुप्ता द्वारा निभाई जा रही है। रामलीला के आयोजन में डा0 मंसूर खान,नमन अली,आशिद अली,नूर मोहम्मद सहित कई मुस्लिमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। रामलीला में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।बाद में रामलीला के सभी कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।