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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी: गणनाकर्मियों की ड्रेस, बायोमीट्रिक और तलाशी, बदल दिए थे नियम; बैंक ने दी थी ये सलाह

Wed, 08 Jul 2026 09:56 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अब नया खुलासा हुआ है। गणनाकर्मियों को लेकर अनिल मिश्रा ने नियम ही बदल दिए थे। पुलिस को कई बैंक कर्मियों की मिलीभगत के सुबूत मिले हैं। 
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Ram Mandir Donation Scam - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा ने गणनाकर्मियों के लिए बनाए गए नियमों में शिथिलता बरती थी, जिससे चोरी की घटनाओं को अंजाम देना आसान हो गया। पुलिस को इस मामले में कई बैंककर्मियों की मिलीभगत के भी सुबूत मिले हैं।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अनिल मिश्रा वित्तीय मामलों, नकदी संकलन के प्रबंधन और गणना प्रक्रिया के पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार थे। बैंक के साथ मिलकर गणना के जो नियम तय किए गए थे, उनमें ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधि के तौर पर वे ही शामिल हुए थे। इस प्रकार, प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी।

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चंपत राय और अनिल मिश्रा - फोटो : PTI
इसलिए प्रक्रिया को पुख्ता तौर से पूरी कराने की जिम्मेदारी उनकी ही थी। वहीं, गणनाकर्मियों के ड्रेस, बायोमीट्रिक, तलाशी आदि को लेकर बनाए गए नियमों को अनिल मिश्रा ने ही शिथिल कर दिए थे। इसलिए इन पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

 
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चंपय राय और अनिल मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
कदम-कदम पर मानकों की उड़ाईं धज्जियां
उधर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आरोप लगाया कि बैंक की सलाह पर मेज और कुर्सी पर बैठकर दान की गणना की जाने लगी, जो चोरी में सहायक साबित हुई। घटना सामने आने के बाद तुरंत मेज हटाकर फिर से जमीन पर बैठकर गणना शुरू कराई गई। 

 

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चंपत राय और अनिल मिश्रा - फोटो : @ChampatRaiVHP
बैंक के चेस्ट रूम में प्रवेश और निकास के दौरान कड़ी तलाशी, बिना जेब वाले कपड़ों का उपयोग अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इन नियमों का पालन नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, बैंक की ओर से गणनाकर्मियों को जो कपड़े उपलब्ध कराए गए, उनमें जेबें थीं।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा - फोटो : @ChampatRaiVHP
गणना के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ को लगाया 
चंपत राय ने सवाल उठाया कि यदि दिशानिर्देश वास्तव में लागू थे तो उनका पालन क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को इस दिशा-निर्देश पत्र की जानकारी ही नहीं थी। बैंक ने गणना के लिए जिन युवकों को लगाया था, वे हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में नियुक्त थे।
 
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चंपत राय - फोटो : amar ujala
चढ़ावा चोरी के लिए बैंक व अनिल मिश्रा जिम्मेदार : चंपत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने लंबी चुप्पी तोड़ते हुए पूरे मसले के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और ट्रस्ट के सदस्य रहे अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को भेजे गए पत्र में उन्होंने दान की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर एसबीआई की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एसआईटी को लिखे पत्र में उन्होंने अपने बयान को जांच के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का अनुरोध किया है।

 
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चंपत राय। - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने पत्र में लिखा कि 6 फरवरी 2025 को जारी गणना प्रक्रिया के लिए बैंक और ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश से वह पूरी तरह असहमत हैं। इस दस्तावेज पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं। चंपत ने दावा किया कि उन्हें इस दिशानिर्देश पत्र की जानकारी 13 जून को ट्रस्ट के अकाउंट कार्यालय से मिली। 
 

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चंपत राय - फोटो : amar ujala
महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर न कराना सवाल
उन्होंने कहा कि अगस्त 2020 से इस साल जून तक ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं के बीच हुए सभी महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके हस्ताक्षर हैं, ऐसे में इस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर उनसे हस्ताक्षर न कराना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि उस समय वह अयोध्या में नहीं थे तो उनके लौटने तक प्रतीक्षा की जानी चाहिए थी। 

 

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राम मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पत्र में उन्होंने 9 फरवरी 2024 को ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एमओयू का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस एमओयू के प्रत्येक पृष्ठ पर उनके हस्ताक्षर हैं और उसमें गणना प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, लोहे की जाली वाला दरवाजा सहित कई प्रावधान किए गए थे। हालांकि, इस वायरल पत्र पर अभी तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसआईटी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
 

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राममंदिर का परिसर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपियों का सात दिन नहीं 40 घंटे का मिला रिमांड
राम मंदिर में चढ़ावा धनराशि चोरी व गबन के मामले में जेल में निरुद्ध आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प व करुणेश की 40 घंटे के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड को मंजूरी मिल गई है। जबकि, विवेचक आशुतोष तिवारी ने 7 दिन की रिमांड की मांगी थी। 

 

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Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला
रिमांड प्रार्थना पत्र पर सुनवाई से पहले विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आरोपियों से उनका पक्ष जाना। विशेष अभियोजन अधिकारी ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर 5 जुलाई को विवेचक ने जेल में जाकर लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा व करुणेश पांडेय का बयान दर्ज किया था। 

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राम मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सराफा कारोबारियों तक पहुंची जांच 
जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल आरोपियों तक सीमित नहीं है। कस्टडी रिमांड के दौरान जुटाए गए इनपुट, आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल डेटा और बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण के बाद जांच का दायरा सराफा कारोबार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ चर्चित जमीन सौदों तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार कई बिंदुओं पर समानांतर जांच चल रही है।
 

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महंत गोविंद देव गिरी ।  
दानपात्र की व्यवस्था महासचिव देखते थे, मैं क्यों दूं इस्तीफा : गोविंद देव
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय से इस्तीफा लिया नहीं गया, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था। गिरी ने कहा कि चंपत राय निर्दोष हैं

 
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राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि - फोटो : ANI
दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं महासचिव चंपत राय के अधिकार क्षेत्र में आती थीं, जबकि उनकी जिम्मेदारी केवल खातों में जमा होने वाली राशि का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है। जब उनसे पूछा गया कि क्या कोषाध्यक्ष होने के नाते वह भी इस्तीफा देंगे, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, मैं क्यों इस्तीफा दूंगा? बिल्कुल नहीं दूंगा। 
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