लखनऊ से छपरा तक ट्रैक पर काम करने वाले रेलकर्मियों की जान ‘रक्षक’ बचाएगी। रेडियो तरंगों पर आधारित यह ऐसी डिवाइस है, जो मेंटेनेंस में लगे कर्मचारियों को ट्रेन के आने से पहले ही अलर्ट कर देगी। करीब 450 किमी लंबे इस रेलखंड पर डिवाइस लगाने में छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार ट्रैक पर मेंटेनेंस, पेट्रोलिंग के दौरान हर साल 400 से अधिक रेलकर्मियों को जान से हाथ धोना पड़ता है। ऐसे में पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने यह पहल की है। इसके तहत ट्रैक पर रक्षक डिवाइसों को लगाना शुरू कर दिया गया है।