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ट्रैक पर रेलकर्मियों की जान बचाएगी ये डिवाइस, ट्रेन आने से पहले ही कर देगी अलर्ट

Thu, 05 Sep 2019 04:56 PM IST
Amulya Rastogi नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ
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रक्षक डिवाइस - फोटो : amar ujala
लखनऊ से छपरा तक ट्रैक पर काम करने वाले रेलकर्मियों की जान ‘रक्षक’ बचाएगी। रेडियो तरंगों पर आधारित यह ऐसी डिवाइस है, जो मेंटेनेंस में लगे कर्मचारियों को ट्रेन के आने से पहले ही अलर्ट कर देगी। करीब 450 किमी लंबे इस रेलखंड पर डिवाइस लगाने में छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार ट्रैक पर मेंटेनेंस, पेट्रोलिंग के दौरान हर साल 400 से अधिक  रेलकर्मियों को जान से हाथ धोना पड़ता है। ऐसे में पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने यह पहल की है। इसके तहत ट्रैक पर रक्षक डिवाइसों को लगाना शुरू कर दिया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
पीआरओ आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि पटरियों की मरम्मत के दौरान रेलकर्मी कई बार इतना व्यस्त हो जाते हैं कि ट्रैक पर आती ट्रेन तक नहीं देख पाते और हादसे का शिकार हो जाते हैं। ऐसे ही पेट्रोलिंग के दौरान गैंगमैन को ट्रेन के आने-जाने की जानकारी नहीं मिल पाती और रनओवर हो जाता था। इससे जहां रेलकर्मियों की जान जाती है, ट्रेनें भी लेट होती हैं। इससे निजात दिलाने को करनैलगंज से बुढ़वल के बीच 30 किमी में ट्रैक पर छह ‘रक्षक’ डिवाइसें लगाई गईं, जिनकी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। अब पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन प्रमुख रेलखंड लखनऊ से छपरा के बीच ये डिवाइसें लगाने जा रहा है। इसकी मंजूरी भी मिल गई है। जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि अंबाला में लगाई गई प्रदर्शनी में भी इस डिवाइस की सफलता से मंडल को पुरस्कृत किया गया।
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रक्षक डिवाइस - फोटो : amar ujala
ऐसे काम करती है डिवाइस
डिवाइस के पहले हिस्से में स्टेशन पर ट्रांसमीटर व टावर लगाए जाते हैं। दूसरे में ट्रैक पर काम करने वाले रेलकर्मी को रिसीवर यानी ‘रक्षक’ फोन दिया जाता है। मान लीजिए, स्टेशन ए व बी के बीच मेंटेनेंस का काम चल रहा है तो ए से ट्रेन रवाना होते ही स्टेशन पर लगे ट्रांसमिटर व टावर से रेडियो तरंगों के जरिये सूचना रेलकर्मी के पास वायरलेस पर तत्काल पहुंच जाएगी और उसका बजर तेज आवाज करने लगेगा। इससे रेलकर्मी अलर्ट हो जाएंगे। इतना ही नहीं अप व डाउन लाइन से आने वाली गाड़ियों पर अलग-अलग आवाजें आएंगी।

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रक्षक डिवाइस - फोटो : amar ujala
ये ऐहतियात बरतने जरूरी
ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन के पदाधिकारी बताते हैं कि रेलवे ट्रैक पर मरम्मत के काम के दौरान दो कीमैन होने जरूरी हैं। साथ ही गैंगमैन जब पटरी पर काम कर रहे हों तो 600 व 1200 मीटर पर एक-एक रेलकर्मी को लाल झंडी लेकर खड़ा होना जरूरी है। इसके अतिरिक्त दो सुपरवाइजर होने चाहिए। सीनियर ट्रैकमैनों को उनके हिसाब से काम देना चाहिए।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ से छपरा तक पूरे रेलवे ट्रैक पर ‘रक्षक’ डिवाइसें लगाई जाएंगी। इससे ट्रैक पर काम करने वाले रेलकर्मियों को रनओवर से बचाया जा सकेगा। इसके लिए महाप्रबंधक का अनुमोदन मिल चुका है। जल्द ही इस रूट पर काम शुरू होगा। - पावस यादव, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर, पूर्वोत्तर रेलवे
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