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Railway contractor Murder: पूरी योजना बनाकर आए थे हत्यारे, रेलवे ठेकेदार को मारने के बाद सबूत भी साथ लेकर चले गए, तस्वीरें

Sun, 26 Jun 2022 03:34 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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मृतक वीरेंद्र ठाकुर (बायें) व घर में जांच के लिए मौजूद फॉरेंसिक टीम। - फोटो : amar ujala
राजधानी लखनऊ के निलमथा बाजार में रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र ठाकुर की शनिवार को दिनदहाड़े हुई हत्या की जांच पुलिस कर रही है। वीरेंद्र के घर पर पुलिस को जो साक्ष्य और जानकारियां मिली हैं। उसके अनुसार, हत्यारे पूरी तैयारी से आए थे। हत्यारे वारदात को अंजाम देने के बाद सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर भी उठा ले गए। बता दें कि डीवीआर वीडियो रिकॉर्डर होता है जिसे हार्डड्राइव भी कहते हैं। इससे कहा जा रहा है कि हत्यारे पूरी योजना बनाकर आए थे।

डीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, मूलरूप से बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया जिला निवासी वीरेंद्र ठाकुर कैंट एरिया के निलमथा बाजार में परिवार सहित रहते थे। परिवार में दूसरी पत्नी खुशबू, तीन बेटे अभिषेक, ऋषि और अंश (सभी पहली पत्नी प्रियंका से हैं) हैं। परिजनों के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 12.30 बजे तीन बदमाश घर के अंदर दाखिल हुए जो सेना की वर्दी पहने थे।

उन्होंने घुसते ही बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद वीरेंद्र ठाकुर के कमरे में गए जहां वे बेड पर लेटे हुए थे। बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसमें से वीरेंद्र को दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में परिजन उनको लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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जांच के दौरान फोरेंसिक टीम। - फोटो : amar ujala
जनवरी से ले रखी थी निजी सुरक्षा
वीरेंद्र ठाकुर को अपने ऊपर हमले की आशंका थी। इसीलिए उसने जनवरी में ही निजी सुरक्षा एजेंसी से चार सुरक्षाकर्मी ले रखे थे जो 24 घंटे उसके साथ चलते थे। शनिवार को वीरेंद्र के घर पर तीन ही सुरक्षाकर्मी मौजूद थे जो वारदात के बाद से ही लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक, हमलावर नकाबपोश थे। शुरूआती पड़ताल में सामने आया है कि बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों, बच्चों को कमरे में बंद कर दिया। लेकिन वारदात के बाद से एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं मिला है। इस बिंदु पर भी पड़ताल की जा रही है।
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- फोटो : amar ujala
किलाबंद घर, सीसीटीवी कैमरे से लैस
वीरेंद्र तीन साल पहले हुए हमले के बाद से खुद की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हो गया था। उसने पूरे घर को एक किले की तरह बनवा रखा था। घर के दरवाजे और दीवारों में जगह तक नहीं छोड़ी। वहीं चारदीवारी पर कंटीले तार लगवा रखे थे ताकि कोई अंदर न दाखिल हो सके। घर के अंदर से लेकर बाहर हर तरफ सीसीटीवी कैमरों का जाल है। वह लगातार अपने कमरे में बैठकर खुद ही कैमरों में आने जाने वालों पर नजर रखता था।

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- फोटो : amar ujala
बिना आदेश के नहीं खुलता था दरवाजा
पुलिस के मुताबिक, पड़ताल में सामने आया है कि सुरक्षाकर्मी बिना वीरेंद्र की अनुमति के दरवाजा नहीं खोलते थे। वह सिर्फ अपने करीबी परिचितों को ही अक्सर घर के अंदर आने की अनुमति देता था। बाकी लोगों से काम पूछकर दरवाजे से ही वापस भेज देता था। यहां तक कि मोहल्ले में किसी से नहीं मिलता था। दूसरी पत्नी खुशबू ने पुलिस को बताया कि वीरेंद्र सिर्फ दीपावली में या किसी विशेष जरूरत पर ही घर से निकलता था। उसके साथ हरवक्त सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे।
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घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala
बिहार में दर्ज हैं कई मुकदमे, पुलिस खंगाल रही वजह
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर पर बेतिया जिले में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बेतिया एसएसपी से संपर्क कर उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगी है। शुरूआती बातचीत में 6-7 केस दर्ज होने की बात सामने आई है। आपराधिक  इतिहास की जानकारी मिलने इसे भी विवेचना में शामिल किया जाएगा। पुलिस की एक टीम जहां बिहार से जुड़े मामलों की डिटेल खंगाल रही है तो एक टीम वीरेंद्र ठाकुर के लखनऊ से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक, बिहार के पुरानी रंजिश में हत्या होने की ज्यादा आशंका है। वहीं लखनऊ में रेलवे के ठेकेदार का विवाद भी हत्या का कारण हो सकता है। पहली पत्नी से विवाद की भी जांच की जा रही है।
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- फोटो : amar ujala
वारदात के बाद भागे सुरक्षाकर्मी भी संदेह के घेरे में
एडीसीपी पूर्वी के मुताबिक, वारदात के बाद जब पुलिस घर पहुंची तो सुरक्षाकर्मियों के बारे में जानकारी मांगी गई। इस पर पत्नी ने बताया कि गोली चलने के बाद ही तीनों सुरक्षाकर्मी वहां से अपना सारा सामान लेकर भाग गए। उन्होंने कहा कि हमारी जान को खतरा है। हम यहां नहीं रुक सकते। पुलिस, सुरक्षाकर्मियों की भी कुंडली खंगाल रही है।
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जांच के लिए घर में मौजूद पुलिस कमिश्नर डी के ठाकुर व अन्य। - फोटो : amar ujala
13 साल से लखनऊ में बनाया था ठिकाना
वीरेंद्र ठाकुर ने पिछले 13 साल से लखनऊ में अपना ठिकाना बना रखा था। वह खुद की पहचान छिपाने के लिए आसपास के लोगों से भी नहीं मिलता था। यहां तक कि बच्चे मोहल्ले में होली या दिवाली पर ही लोगों से मिलने जाते थे। वह खुद भी घर न के बराबर ही निकलता था।
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