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राहुल से बोला अमेठी वासी, ‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले'

Tue, 19 May 2015 02:01 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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‘बेटा! चलो अच्छा हुआ, आप बदले। सांसद बनने के बाद पहली बार आप इधर तो आए। अच्छा होगा अपने पिताजी की तरह आप भी मैप बना लो। वे मैप बनाकर क्षेत्र में घूमते थे। जिस गांव में न जा पाते, उस पर टिक लगा लेते। दोबारा वहां जरूर जाते। आपको याद हो या न याद हो। बचपन में आप और प्रियंका बिटिया भी हाथी पर बैठकर इस इलाके में घूमे हो’।
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पूरे ठकुराइनपुरवा के पास नजरगांव के रहने वाले रिटायर्ड स्कूल टीचर शब्बीर हुसैन ने जब राहुल गांधी से ये बातें कहीं तो वे मुस्करा दिए। राहुल का काफिला आगे बढ़ा और मास्टर शब्बीर पास खड़े लोगों को बताने लगे कि अब राहुल बेटा पर राजीव भैया का कुछ-कुछ असर आ रहा है। काफी बदले हुए हैं। मोदी सरकार से दो-दो हाथ करने की तैयारी के साथ आए हैं। देखना...बहुत जल्द मोदी सरकार के खिलाफ पूरे देश में माहौल बना देंगे।
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पूरे ठकुराइन पुरवा से कुछ आगे मिर्जागढ़ में एक मकान के सामने पड़े तख्त पर राहुल बैठ गए। गांव की महिलाओं व पुरुषों ने उन्हें घेर लिया। विमला बोली, पहली बार भैया तुमका इतना नजदीक से देखेन। राहुल ने माइक संभाला। बोले, ज्यादा बरसात और ओलों से इस इलाके में बहुत नुकसान हुआ है। केंद्र व प्रदेश सरकार कोई मदद नहीं कर रही है। फिर मुद्दे पर आए। माइक गड़बड़ करने लगा तो भी आक्रामक अंदाज में मोदी पर ताबड़तोड़ हमला बोला।

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बताया कि कांग्रेस सरकार आपके इलाके में इंडोगल्फ के पास फूड पार्क बनवाने जा रही थी। बन जाता तो किसानों को बिचौलियों के हाथों शोषण का शिकार न होना पड़ता, पर मोदी सरकार ने उसे रद्द कर दिया। यह सरकार किसानों और गरीबों की दुश्मन है। फूड पार्क की योजना को मोदी ने मेरे प्रति बदले की भावना से रद्द किया है। वे मुझे चोट पहुंचाते तो कोई बात नहीं थी, पर उन्होंने किसानों को चोट पहुंचाई है। इसका बदला लिया जाएगा।
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चुन-चुन कर हमले: लगा कि दो महीने के अज्ञातवास के बाद राजनीति में दोबारा सक्रिय हुए राहुल-टू और राहुल-वन में भले ही बहुत फर्क न आया हो लेकिन कुछ न कुछ जरूर आया है। बात दीगर है कि अमेठी के लोगों के सवालों और यहां के सरोकारों की कसौटी पर खुद को कसने के लिए अभी राहुल को बहुत कुछ करना पड़ सकता है। पर, छह महीने बाद राहुल को देखने व सुनने वालों की मानें तो राहुल-वन गुमसुम और खोए-खोए से रहते थे, पर राहुल-टू बोलना और हमला करना सीख गए हैं।
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तभी तो जब वे इन्हौना में स्वागत करने वाली भीड़ को देखकर न सिर्फ गाड़ी से उतरते हैं, बल्कि लोगों की धक्का-मुक्की में मुस्कराते हुए तख्त पर खड़े होकर उन्हें संबोधित करते हैं। कहीं चौकीदार के कंधे पर हाथ रखते हैं तो कहीं बाग में गाड़ी लगाकर सहयोगियों के साथ लंच। औद्योगिक क्षेत्र में हाईवे पर उतरकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर फूड पार्क वाले स्थान पर पहुंचते हैं तो लोगों को उनमें राजीव गांधी का अक्श नजर आता है।
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जब वे पार्क वाली जमीन के पास खड़ी गाड़ी पर चढ़कर मोदी सरकार पर हमला बोलते हैं और हसवां गांव में किसानों की पंचायत में इलाके में लेखपाल द्वारा सर्वेक्षण न करने की शिकायत पर तिलोई के एसडीएम बीपी पाल को बुलाकर सवाल करते हैं तो लोगों को लगता है कि राहुल-टू सड़क पर भी संघर्ष करने के लिए खुद को तैयार कर चुके हैं।

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शंकरगंज में खुद राहुल कहते हैं कि वे सड़क से लेकर विधानसभाओं और संसद में किसानों और गरीबों की लड़ाई लड़ेंगे। किसानों की सहमति के बगैर उनकी सोना जैसी कीमती जमीन मोदी के पूंजीपति दोस्तों को किसी कीमत पर जबरिया नहीं देने देंगे।

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करीने से करते हैं राजनीतिक हमला : एक  जगह राहुल से सवाल होता है कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी तो कहती हैं कि मेगा फूड पार्क परियोजना कांग्रेस सरकार में ही रद्द हो गई थी। राहुल तपाक से गाड़ी में रखा एक कागज मंगाकर दिखाते हैं।

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कहते हैं, ‘देखो 30 जून 2014 को रद्द हुई है। इस दिन किसकी सरकार थी?’ राहुल कहते हैं कि वे मोदी सरकार को जीरो नंबर देंगे क्योंकि इस सरकार ने किसानों व गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। वे यह कहना भी नहीं भूलते कि मोदी के कुछ पूंजीपति मित्र उन्हें 10 में 10 नंबर देंगे तो लगता है कि वाकई राहुल-टू बहुत अलग हैं।

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वे जब यह कहते हैं कि मोदी विदेश जाएं कोई दिक्कत नहीं, लेकिन किसी किसान के घर भी हो आएं तो लगता है कि वे करीने से राजनीतिक हमला करना सीख गए हैं। वे जब किसानों को यह समझाते हैं कि जमीन सोना जैसी है।  समय के साथ इसकी कीमत बढ़ती है, पर मोदी सरकार ने नियम बदलकर इसे पूंजीपतियों को देने का कानून बना दिया।
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कांग्रेस सरकार ने तय किया था कि किसानों की अधिगृहीत जमीन पर कोई उद्योग अगर पांच साल में नहीं लगेगा तो जमीन किसान को वापस मिल जाएगी। पर, मोदी सरकार ने इस कानून को खत्म कर दिया। अब एक बार जमीन गई तो गई।
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