पहले जानिए, क्या है यह प्रोजेक्ट
मनीष ने बताया कि कोविड काल में हमने महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए शहर से गांव तक प्रोजेक्ट शुरू किया था। लोग जुड़ते गए कारवां बनता गया। इस बीच अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखी गई। एक दिन यूं ही खयाल आया कि भगवान को पॉलीएस्टर के परिधान क्यों पहनाए जाएं, जबकि हम खुद पहनना कभी पसंद नहीं करेंगे। इसी उधेड़बुन में खादी मास्क के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया, तब लगा कि खादी को हर घर तक पहुंचाने के लिए क्यों न शुरुआत रामलला से की जाए। खादी हो या इसे बुनने वाले या फिर परिधान तैयार करने वालों में हर धर्म के लोग जुड़े हैं। सर्वधर्म समभाव का प्रतीक भी है खादी।