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लखनऊ में अब इस बंगले को अपना आशियाना बनाएंगी प्रियंका गांधी, सजाने-संवारने का काम शुरू, तस्वीरें

Thu, 02 Jul 2020 07:48 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
कांग्रेस महासचिव और पार्टी की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा का स्थायी पता अब 23/2 गोखले मार्ग, लखनऊ होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय शीला कौल की इस कोठी को नए सिरे से सजाया-संवारा जा रहा है। कांग्रेसियों का कहना है कि यह प्रियंका से दिल्ली का सरकारी आवास खाली कराने का नोटिस देने वाली भाजपा सरकार को माकूल जवाब भी है। हालांकि, लखनऊ आने पर प्रियंका पहले भी इस आवास का ठहरने के लिए इस्तेमाल करती रही हैं।
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- फोटो : amar ujala
कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि प्रियंका की राजनीति में बढ़ती सक्रियता से केंद्र सरकार ने उनसे दिल्ली का सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिलवाया है। स्थानीय कांग्रेसियों की मानें तो अब प्रियंका अपना ज्यादातर समय लखनऊ में बिताएंगी।
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- फोटो : amar ujala
पार्टी को मजबूत करने के लिए ऐसा जरूरी माना जा रहा है। इस कोठी को नए सिरे से प्रियंका के लिए ठीक किया जा रहा है।

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- फोटो : amar ujala
कुछ कांग्रेसियों का यह भी कहना है कि लोकसभा चुनाव के वक्त ही प्रियंका ने यह निर्णय ले लिया गया था कि ज्यादा वक्त लखनऊ और यूपी को देना है। इसलिए इसे प्रियंका को दिल्ली में सरकारी आवास खाली करने के नोटिस से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
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- फोटो : amar ujala
एमएलसी दीपक की देख-रेख में हो रहा काम
प्रियंका के लिए इस कोठी को ठीक करने और सजाने-संवारने की जिम्मेदारी कांग्रेस के विधान परिषद दल के नेता दीपक सिंह को दी गई है। वे यहां लगातार मौजूद रहकर काम करवा रहे हैं। हालांकि इस बाबत कुछ पूछने पर वे चुप हो जाते हैं। दीपक ने इतना जरूर कहा कि दिल्ली में प्रियंका गांधी को मकान खाली करना है। इसलिए अब उनका स्थायी पता लखनऊ की यही कोठी होगी।
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- फोटो : amar ujala
राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रही कोठी
शीला कौल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साले प्रोफेसर कैलाशनाथ कौल की पत्नी थीं। कांग्रेस सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं थीं। कई मायनों में उनकी यह कोठी काफी ऐतिहासिक है।
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प्रियंका गांधी - फोटो : amar ujala
यहां प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी रुके हैं। उन्होंने यहां 1936 में वट वृक्ष भी लगाया। यह कोठी आजादी के आंदोलन के समय भी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रही है। यही वजह है कि प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने के बाद इस कोठी को उनके लिए उपयुक्त माना गया।
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