जिम में घंटों बिताने वाले प्रतीक यादव की फिटनेस के पीछे गंभीर बीमारी छिपी थी। प्रतीक यादव पिछले छह महीने में पांच बार अस्पताल में भर्ती हुए थे। वो
लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस से जूझ रहे थे।
नियमित तौर पर जिम में घंटों बिताना, वर्जिश करना प्रतीक यादव का शौक था। सोशल मीडिया पर अकसर वह गठीले बदन की फोटो अपलोड करते थे, लेकिन कई बार मजबूत कद-काठी स्वस्थ दिल की निशानी नहीं होती है।
प्रतीक के साथ भी यही हुआ। वह लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। नियमित रूप से ब्लड थिनर व बीपी की दवाएं ले रहे थे। इन बीमारियों की वजह से उन्हें छह माह में पांच बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
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प्रतीक यादव की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
अप्रैल में सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर प्रतीक को मेदांता की आईसीयू में भर्ती किया गया था। वहां के चिकित्सकों ने बताया कि हालत में सुधार होने पर वह बिना बताए घर चले गए थे। वह एंग्जाइटी से भी जूझ रहे थे।
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प्रतीक यादव की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
अचानक कसरत छोड़ देना हो सकता है घातक
केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि बॉडी बिल्डिंग करने वाले अचानक गतिविधियां कम कर दें तो उनमें डीप वेन थ्रॉम्बोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
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Prateek Yadav
- फोटो : अमर उजाला
इस स्थिति में पैरों की नसों में खून के थक्के बनने लगते हैं। यही थक्के टूटकर रक्त प्रवाह के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और वहां की नसों में फंसकर पल्मोनरी थ्रॉम्बोएंबोलिज्म की स्थिति पैदा कर देते हैं।
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प्रतीक यादव।
- फोटो : amar ujala
पल्मोनरी थ्रॉम्बोएंबोलिज्म को समझें
इस स्थिति में शरीर के किसी भी हिस्से की नसों में बना खून का थक्का आगे बढ़कर फेफड़ों की मुख्य नस को बंद कर देता है। इससे ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है और दिल पर अचानक दबाव बढ़ जाता है।
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प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार में शोकाकुल अवस्था में परिजन
- फोटो : शुभम बंसल
बुधवार को हुआ था प्रतीक का निधन
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव (38) का बुधवार तड़के निधन हो गया था। वह विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास के किचन में सुबह करीब चार बजे अचेत अवस्था में मिले थे। इसके बाद प्रतीक के नौकर ने सिविल अस्पताल में फोन किया। डॉक्टरों की टीम प्रतीक के घर गई। घर पर उनके शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी।
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पिता प्रतीक यादव को अंतिम विदाई देती बेटी
- फोटो : शुभम बंसल
इसके बाद प्रतीक को सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, प्रतीक यादव के घर जब सिविल अस्पताल के डॉक्टर पहुंचे तो उन्हें कुछ समझ में नहीं आया। इसके बाद प्रतीक को अस्पताल लाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें ब्रॉड डेड घोषित कर दिया।
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पिता प्रतीक यादव को अंतिम विदाई देती बेटियां
- फोटो : शुभम बंसल
प्रतीक का शरीर नीला पड़ गया था। ऐसे में मौत का कारण पता करने के लिए डॉक्टरों ने पुलिस को पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी। केजीएमयू में हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हृदय गति रुकने और फेफड़ों में खून का थक्का जमने को मौत का कारण बताया गया।
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पिता प्रतीक यादव को अंतिम विदाई देती बेटियां
- फोटो : शुभम बंसल
पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों के पैनल ने जांच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया। विसरा को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां से जांच रिपोर्ट आएगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतीक ने कोई संदिग्ध पदार्थ तो नहीं खाया था। बताया जा रहा है कि तबीयत बिगड़ने पर प्रतीक अपने कमरे से बाहर निकले थे। आशंका जताई जा रही है कि वह दवा खाने के लिए पानी लेने किचन की तरफ गए थे। इसी दौरान अचेत हो गए।
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प्रतीक यादव की बेटी से बात करते हुए अखिलेश यादव
- फोटो : शुभम बंसल
हालांकि, इस संबंध में प्रतीक के परिवार की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रतीक यादव के शरीर पर चोट के छह निशान मिले। ये करीब सात से दस दिन पुराने बताए जा रहे हैं। इनमें से कोई भी चोट गंभीर नहीं थी।
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प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार में लकड़ी डालते सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाई अखिलेश यादव
- फोटो : शुभम बंसल
खून का थक्का बन जाने की थी समस्या, चल रहा था इलाज
सांस फूलने की समस्या पर प्रतीक 29 अप्रैल को गए थे मेदांता अस्पताल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई खून का थक्का बनने की समस्या
हृदय गति रुकने की वजह से जान गंवाने वाले प्रतीक यादव को हायपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के साथ ही खून का थक्का बनने की भी समस्या थी। मेदांता अस्पताल में इसका इलाज चल रहा था। 29 अप्रैल को सांस लेने में समस्या होने पर प्रतीक यादव अंतिम बार मेदांता अस्पताल पहुंचे थे।
प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार में शोकाकुल अवस्था में परिजन
- फोटो : शुभम बंसल
मेदांता अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और इंटरनल मेडिसिन विभाग की डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया कि 29 अप्रैल को जांच में थक्का बनने के साथ ही दिल संबंधी समस्या की पुष्टि भी हुई थी। खून का थक्का बनने की समस्या को डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है। यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो जानलेवा साबित हो सकती है।