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... तो इस वजह से होती है प्रसव के बाद महिलाओं की मौत

Tue, 26 Jun 2018 04:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
यूपी में पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव के दौरान या बाद में रक्तस्राव) आज भी महिलाओं की मौत की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी व निजी चिकित्सा संस्थानों के चिकित्सकों की जांच में यह खुलासा हुआ है। टीम ने प्रसव के दौरान हुई 90 महिलाओं की मौत की वजहों का विश्लेषण करने के बाद रिपोर्ट जारी की है।
 
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आई सामने ये हकीकत

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- फोटो : डेमो
रिपोर्ट में बताया कि संस्थागत प्रसव के बजाय घरों में प्रसव करवाने से मौत की आशंका सात गुना तक बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 5.29 लाख महिलाएं इसी वजह से प्रसव के दौरान मौत के मुंह में समा जाती हैं और इनमें 1.36 भारतीय महिलाएं होती हैं।
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डेमो
आमतौर पर मातृत्व मृत्यु दर में ऐसी महिलाओं की मौतों को शामिल किया जाता है, जिनकी मौत गर्भावस्था, प्रसव के दौरान या प्रसव के 42 दिन के भीतर हुई हो। मौजूदा अध्ययन में ऐसी ही 90 महिलाओं के कारणों का विश्लेषण किया गया। सभी 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की थीं। वहीं, जनगणना 2011 के अनुसार लखनऊ की क्रूड बर्थ रेट 29.7 प्रतिशत और मातृत्व मृत्यु दर 359 प्रति एक  लाख जीवित प्रसव थी। हालांकि यह भी माना जाता है कि 25 से 40 प्रतिशत मौतों के वास्तविक कारण दर्ज नहीं किए जाते हैं।
 

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- फोटो : डेमो
यह हकीकत आई सामने 
- 90 में से 31 मौतें पोस्टपार्टम हैमरेज से हुई थीं।
- इनमें से 20 मृत महिलाएं यानी करीब 64.5 प्रतिशत निरक्षर थीं।
- 6 की शादी 18 वर्ष से पहले हो चुकी थी।
- 17 का पहला प्रसव 21 वर्ष की उम्र से पहले हो चुका था।
- 20 महिलाओं में एनीमिया प्रसव के दौरान था।
- 5 महिलाएं गर्भावस्था के आखिरी महीने में पहली बार अस्पताल जांच करवाने पहुंची थीं।
- 11 महिलाओं का प्रसव घर में हुआ था।
 
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- फोटो : डेमो
निष्कर्ष
- पोस्टपार्टम हैमरेज एक इमर्जेंसी स्थिति है, जिसमें समय रहते इलाज न मिले तो मृत्यु हो सकती है।
- खून का बहाव रोकने के लिए पहला घंटा महत्वपूर्ण है।
- अगर, इमरर्जेंसी की स्थिति में महिला के पति, मां या सास का शिक्षित होना उन्हें त्वरित निर्णय लेने में मदद करता है।
- प्रसव से पूर्व निर्धारित महीनों में, कम से कम चार दफा जांच अनिवार्य है अन्यथा प्रसव जटिलताएं बढ़ने पर पता नहीं चल पाती।
- एनीमिया और वायरस संक्रमण की समय पर पहचान भी जान बचाने में सहायक साबित हो सकती है। 
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