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शिक्षित कर बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहीं हैं पूजा, महज 12 साल की उम्र से शुरू किया ये काम

Sat, 01 Sep 2018 01:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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स्कूली बच्चों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देतीं पूजा विश्वकर्मा - फोटो : amar ujala
खेलने कूदने और पढ़ने की कच्ची उम्र में गरीब बच्चों को शिक्षित करने का जज्बा वाकई काबिल-ए-तारीफ है। महज बारह वर्ष की उम्र से लखनऊ की पूजा विश्वकर्मा कुछ ऐसे ही काम में जुटी हैं। बैचलर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई कर रही पूजा बाल मंच के जरिए गरीब बच्चों को पढ़ाने के साथ आत्म रक्षा के गुर सिखा रही हैं। साथ ही सरकारी योजना के तहत उनका निजी स्कूलों में दाखिला भी करा रही हैं ताकि उनकी पढ़ाई नियमित जारी रहे...।
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पूजा विश्वकर्मा - फोटो : amar ujala
 सिर्फ और खेल और मस्ती में अपना जीवन गंवा रहे बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा में लाने के काम में जुटी हैं पूजा विश्वकर्मा। पूजा महज 12 साल की उम्र से बाल मंच के नाम से इस अभियान को वर्ष 2007 से चला रही हैं। मड़ियांव के झुग्गी-झोपड़ी वाले क्षेत्र में उस समय तक एक भी बच्चा स्कूल नहीं जाता था। पूजा के प्रयास से बच्चों ने न सिर्फ स्कूल जाना शुरू किया बल्कि बाल मंच में भी इस समय करीब 100 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ ही इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
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पूजा विश्वकर्मा - फोटो : amar ujala
पूजा ने बताया कि स्कूल न जाने वाले बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत सबसे पहले उनकी बड़ी बहन ने की थी। बाद में वे दूसरे अभियान में लग गईं। इसके बाद उन बच्चों की पढ़ाई बंद होने की कगार पर आ गई। ऐसे में कक्षा छह की अपनी पढ़ाई के साथ ही बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी उठाई। इस अभियान को बाल मंच का नाम दिया गया। यहां पर बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ ही कई क्षेत्र की जानकारी दी जाती है। छात्राओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी इस मंच पर दी जाती है। पूजा इस समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई कर रही हैं। आगे चलकर इसी विषय में मास्टर्स की पढ़ाई करके पूरा जीवन बच्चों के लिए ही देना चाहती हैं।

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पूजा विश्वकर्मा - फोटो : amar ujala
एक हजार से अधिक बच्चों को दिला चुकी हैं स्कूलों में दाखिला 
पूजा ने क्षेत्र के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूल में दाखिला दिलाने का अभियान भी चलाया। इस अभियान के तहत पिछले सात साल में पूजा एक हजार से ज्यादा बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला दिला चुकी हैं।
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पूजा विश्वकर्मा - फोटो : amar ujala
निशुल्क हो बच्चों की शिक्षा
पूजा का मानना है आठवीं तक की शिक्षा का पूरा खर्च सरकार को ही उठाना चाहिए। प्राइवेट स्कूल जैसी चीज आठवीं तक नहीं होनी चाहिए। इससे लोगों में असमानता की भावना समाप्त होगी। सभी बच्चे एक साथ पढ़ाई करेंगे और सबके पास एक समान आगे बढ़ने का मौका होगा।
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