पूजा विश्वकर्मा
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पूजा ने बताया कि स्कूल न जाने वाले बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत सबसे पहले उनकी बड़ी बहन ने की थी। बाद में वे दूसरे अभियान में लग गईं। इसके बाद उन बच्चों की पढ़ाई बंद होने की कगार पर आ गई। ऐसे में कक्षा छह की अपनी पढ़ाई के साथ ही बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी उठाई। इस अभियान को बाल मंच का नाम दिया गया। यहां पर बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ ही कई क्षेत्र की जानकारी दी जाती है। छात्राओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी इस मंच पर दी जाती है। पूजा इस समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई कर रही हैं। आगे चलकर इसी विषय में मास्टर्स की पढ़ाई करके पूरा जीवन बच्चों के लिए ही देना चाहती हैं।