लखनऊ में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए 195 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए पुलिस व प्रशासन ने योजनाओं का डीपीआर बनाकर गृह विभाग का सौंपा दिया है। गृह विभाग ने एडीजी महिला पावर लाइन अंजू गुप्ता से कहा है कि वह इस डीपीआर का परीक्षण कर 24 अप्रैल तक रिपोर्ट दें। क्या रहेगा प्लान यह जानने के लिए आगे की स्लाइड पर क्लिक करें।
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दरअसल इसी साल जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए लखनऊ समेत देश के आठ शहरों को चुना था। इसके तहत सीसीटीवी कैमरे, सेफ टॉयलेट और लाइटिंग की व्यवस्था समेत और क्या क्या उपाय किए जा सकते हैं और इस पर कितना खर्च आएगा, इसको लेकर डीएम, एसएसपी और नगर आयुक्त से इस पर एक डीपीआर बनाने को कहा गया था।
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इसमें महिला कॉलेजों के बाहर और ऐसे सार्वजनिक स्थानों, बाजारों में जहां महिलाओं, छात्राओं को आना जाना अधिक रहता है, वहां सड़कों और चौराहों पर कैमरे के साथ रात में लाइट की पर्याप्त व्यवस्था, सिटी बसों और मेट्रो में सुरक्षा इंतजाम करने के लिए योजना तैयार की गई है।
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पहले से चल रहीं योजनाएं नहीं होंगी शामिल
गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए जो प्लान तैयार किया गया है, उसमें इस बात का ख्याल रखा जा रहा है कि पहले किसी भी काम की ओवरलैपिंग न होने पाए। महिलाओं के लिए अलग से पिंक बस चलाए जाने की योजना पहले से चल रही है या जहां पूर्व में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, ऐसे कामों को दोबारा कराए जाने की आवश्यकता नहीं है।
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क्राइम मैप के अनुसार किस स्थान पर कैमरे की अधिक आवश्यकता है, किन स्थानों पर लाइटिंग बढ़ाए जाने की व्यवस्था करनी है। 195 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में 60 प्रतिशत अंशदान केंद्र का और 40 प्रतिशत राज्य सरकार का होगा।
प्रोजेक्ट में एक साइबर लैब भी शामिल है। इस लैब के माध्यम से सोशल मीडिया खासकर फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर होने वाले अपराध की जांच व रोकथाम के लिए यह साइबर लैब तैयार की जाएगी। लखनऊ के अलावा मॉडल सिटी के लिए जो शहर चिह्नित किए गए हैं, उसमें दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई के साथ बैंगलुरू, अहमदाबाद और हैदराबाद शामिल हैं।