समायोजन रद्द होने के बाद सरकार से समझौता वार्ता में अब तक कोई हल न मिलने से नाराज शिक्षामित्रों ने यूपी भर में आंदोलन करना शुरू कर दिया है, जिससे बृहस्पतिवार को कई जिलों में स्कूलों में ताले लटके रहे। शिक्षामित्रों ने मानदेय बढ़ाने और सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू याचिका दायर करने की मांग की। वहीं, दो दौर में अपर मुख्य सचिव से हुई वार्ता के बाद शिक्षामित्रों ने देर रात दावा किया है कि सरकार ने उनकी तीन मांगों पर सहमति जताई है। (शिक्षामित्रों ने रायबरेली में झाड़ू लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।)
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शिक्षामित्रों ने लखनऊ सहित अधिकांश जिलों में स्कूलों का बहिष्कार कर जिला मुख्यालय पर धरना एवं प्रदर्शन किया। इलाहाबाद में करीब तीन हजार शिक्षामित्रों ने सत्याग्रह शुरू कर दिया है। बरेली में एक घंटे तक डीएम आवास को घेरे रखा, जबकि हाथरस में बीएसए दफ्तर में तोड़फोड़ की। इसी तरह अन्य जिलों में भी धरना प्रदर्शन कर शिक्षामित्रों ने सरकार पर दबाव बनाया। वहीं बृहस्पतिवार को सुबह विभाग के अपर मुख्य सचिव से शिक्षामित्रों की फिर से वार्ता हुई। उन्होंने शिक्षामित्रों से धरना प्रदर्शन समाप्त कर स्कूलों में पढ़ाई सुचारु कराने को कहा। पहले दौर की वार्ता विफल रहने के बाद बृहस्पतिवार देर रात फिर शिक्षा मित्रों को वार्ता के लिए बुलाया गया।
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बहराइच में शिक्षामित्रों ने राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल के कार्यालय का घेराव किया।
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शिक्षामित्र
- फोटो : amar ujala
अनुपमा जायसवाल के कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते शिक्षामित्र।
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अंबेडकरनगर में समायोजन की मांग को लेकर जिले के करीब दो हजार शिक्षामित्रों ने स्कूली बच्चों की बढ़ाई बंद कर फिर आंदोलन की राहत पकड़ ली है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट के निकट निकट एकत्र हुए सैकड़ों शिक्षामित्रों ने तीन दिवसीय सत्याग्रह शुरू किया है। शिक्षामित्रों के आंदोलन का सीधा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। धरना-प्रदर्शन के बीच शिक्षामित्रों ने कहा कि 20 अगस्त तक उनकी मांगों के संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया तो 21 अगस्त से लखनऊ में विधानभवन के समक्ष अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे।शिक्षामित्रों ने प्रदेश व्यापी आह्वान पर एक बार फिर से आन्दोलन शुरू कर दिया है। पूर्व में समायोजित हुए 1601 शिक्षामित्रों के साथ जिले के 2142 शिक्षामित्रों ने गुुरुवार को कार्य बहिष्कार शुरु कर दिया। वह विद्यालय नहीं पहुंचे जिससे शिक्षण व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा।
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बहराइच में सरकार की चुप्पी से जिले के शिक्षामित्र फिर आंदोलित हो उठे हैं। इसके चलते गुरुवार को जिले के लगभग 700 स्कूलों में ताले लटक गए। वहीं शिक्षामित्रों ने कार्य बहिष्कार करते हुए बहाली के लिए अध्यादेश की मांग तेज कर दी है। शिक्षामित्रों के प्रदर्शन से जिले की शिक्षा व्यवस्था फिर चरमरा गई है। अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी है। जिले के 14 विकास खंडों में 2470 प्राथमिक व 983 जूनियर विद्यालय स्थापित हैं। प्राथमिक विद्यालयों में 3100 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें लगभग 2200 शिक्षामित्र समायोजित होकर सहायक अध्यापक बनाए गए थे। जबकि शेष के समायोजन की प्रक्रिया रुकी हुई हैं। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद समायोजित शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हो गया। इसके चलते शिक्षामित्रों ने आंदोलन शुरू किया।
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फैजाबाद में मुख्यमंत्री पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आक्रोशित सैकड़ों शिक्षामित्रों ने गुरुवार को बीएसए कार्यालय का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया। सरकार से त्वरित निर्णय लेते हुए अध्यादेश पारित करने की मांग की। शिक्षामित्रों के तल्ख तेवरों की सूचना से पुलिस बल भी बीएसए ऑफिस पर पहले से सतर्क रहा। समायोजन निरस्त किए जाने के बाद से शिक्षामित्र 26 जुलाई से एक अगस्त तक लगातार प्रदर्शन करके शासन के नाक में दम कर दिया था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों के प्रांतीय नेतृत्व से वार्ता करके प्रदर्शन को स्थगित करा दिया था। अब 15 दिन बीत जाने के बाद सरकार से उपेक्षित सैकड़ों शिक्षामित्रों ने गुरुवार को नारेबाजी करते हुए बीएसए कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन में नगर विद्यायक वेद प्रकाश गुप्ता पहुंचे, जिन्हें शिक्षामित्रों ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया और सीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
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विधायक ने शिक्षामित्रों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी समस्याओं से अवगत है, जल्द ही शिक्षामित्रों के पक्ष में ठोस निर्णय लेगी। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष विश्वनाथ सिंह ने कहा कि सरकार की वादाखिलाफी शिक्षामित्रों पर भारी पड़ रही है। केंद्र सरकार के माध्यम से संसद में अध्यादेश पारित कराकर उसे तत्काल प्रदेश सरकार को भेजने की मांग की है। श्री सिंह ने कहा कि इतना ही नहीं इस अवधि में शासन से उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर स्थगन आदेश लेते हुए पुनर्विचार याचिका भी दाखिल करने की मांग रखी।
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रायबरेली में भी शिक्षामित्र सड़क पर आ गए और विकास भवन में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया। बीएसए कार्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर विरोध जताया। शिक्षामित्रों की हड़ताल से 200 स्कूलों में ताले लटक गए और पढ़ाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। बच्चे स्कूल पहुंचे, लेकिन ताला लटकता देख उन्हें लौटना पड़ा।
शिक्षामित्रों ने एक स्वर में एलान किया कि मांग पूरी न किए जाने तक हड़ताल चलती रहेगी। आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, जिला महामंत्री पुष्पेंद्र त्रिवेदी की अगुवाई में शिक्षामित्र बृहस्पतिवार को डिग्री कॉलेज चौराहे से प्रदर्शन करते हुए विकास भवन पहुंचे और यहीं पर धरने पर बैठ गए।
हड़ताल की वजह से एकल शिक्षक वाले 200 स्कूलों के ताले नहीं खुले और बच्चों को लौटना पड़ा। जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि समायोजन रद्द कर दिए जाने से शिक्षामित्रों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है। सरकार भी उनकी मांगें माने को तैयार नहीं हुई है, जिसका नतीजा रहा कि हड़ताल फिर से शुरू कर दी गई है। मांगों को लेकर शिक्षामित्र चुप नहीं बैठेंगे।
शिक्षामित्रों की हड़ताल से वैसे तो हर स्कूल में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित रहा, लेकिन 200 एकल स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से चौपट रही। पूरे मान सिंह, एकडला, मेलथुवा, पुलियापुर, मुतवल्लीपुर आदि एकल शिक्षक वाले स्कूलों में तालाबंदी होने करीब 10 हजार बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। एक तरफ इन स्कूलों में ताले लटक रहे हैं, लेकिन पठन-पाठन का कार्य शुरू कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। यदि ताला खुल भी जाता है तो कोई शिक्षक नहीं पहुंचता है। इन स्कूलों के संचालन के लिए 200 शिक्षकों की जरूरत है। यह हाल तब है, जब पहले यहां पर शिक्षकों की कमी है।