बेटियों के साथ मुस्कुराते हुए सेल्फी लेना महज एक चित्र भर नहीं है। यह माता-पिता का अरमान भी है कि उसकी बेटी हमेशा मुस्कुराती रहे और मुस्कुराते हुए बेटी के चित्र की तरह ही उसकी जिंदगी भी हमेशा खुशहाल रहे। ...और ये खुशनुमा खूबसूरत लम्हे दोनों के जेहन में हमेशा चित्र की तरह अंकित रहें। इसी सोच को जीवंत बनाने के लिए अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में ‘कार्यस्थल पर बेटियां’ का आयोजन किया जा रहा है। (तस्वीर में, मां बिंदु त्रिपाठी के साथ बेटी इशि त्रिपाठी। स्थान- डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय।)
अक्षिता व अपूर्वा
पिताः कृष्ण कुमार यादव
निदेशक डाक सेवाएं
स्थानः लखनऊ मुख्यालय
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कार्यस्थल पर बेटियां
- फोटो : amar ujala
एसएसपी कलानिधि नैथानी अपनी बेटी के साथ पुलिस कैंप ऑफिस पहुंचे।
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कार्यस्थल पर बेटियां
- फोटो : amar ujala
मेरी बेटी मेरा गौरव मेरी सब कुछ है। बेटी के होने से जो सम्मान महसूस करती हूं उसको शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। मैं अपनी बेटी को वो सब संसाधन उपलब्ध कराउंगी जो समाज में बेटों को दिया जाता है।
सानवी खत्री
माताः गुंजन खत्री, प्रिंसिपल
स्थानः लखनऊ मॉडल पब्लिक स्कूल फरीदीपुर
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कार्यस्थल पर बेटियां
- फोटो : amar ujala
मेरी बेटी बेटे से बढ़कर है। बेटी हंसती है तो चेहरे पर खुशी खिलखिलाती है। मेरा मानना है कि बेटी का होना किसी महिला के लिए सम्मान की बात है।
हर्षाली अग्रवाल
माताः डॉ बबीता जैन, संगीत शिक्षिका
स्थानः जुबिली इंटर काॅलेज
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कार्यस्थल पर बेटियां
- फोटो : amar ujala
एडिशनल एसपी लॉ एंड ऑर्डर चिरंजीव सिन्हा अपनी बेटियों पावनी सिन्हा व लहर सिन्हा के साथ।
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कार्यस्थल पर बेटियां
- फोटो : amar ujala
बेटियां सबसे अलग होती हैं इनकी देखभाल भी विशेष रूप से करनी होती है। समाज में इनका स्थान कहीं ज्यादा सम्मानजनक है।
सलोनी
माताः आरती सिंह ( सहायक अध्यापिका)
स्थानः राजकीय बालिका इंटर कॉलेज छोटी जुबिली
बेटी से ही पूरा संसार है। मेरे पेशे में हाथ बंटाती है। हर माता-पिता अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाएं।
डॉ अपूर्वा सिंह
पिताः डॉ टीपी सिंह (पूर्व निदेशक)
स्थानः बलरामपुर अस्पताल