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डायरी के पन्नों से आतंकियों की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश, अंग्रेजी-मलयालम में लिख रखा था पूरा प्लान व कोडवर्ड

Thu, 18 Feb 2021 03:15 PM IST
ishwar ashish इंद्रभूषण दुबे, अमर उजाला, लखनऊ
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बरामद हुए डायरी के पन्ने। - फोटो : amar ujala
देशभर में हमले की साजिश रचने में गिरफ्तार पीएफआई के दोनों कमांडरों से एसटीएफ की पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि आतंक फैलाने की साजिश साल भर पहले रची गई थी। इसमें भीड़ पर बड़े पैमाने पर हमले की योजना थी। इसे सीएए और एनआरसी के हिंसक आंदोलन को असफल होने के बाद अंजाम देना था। मगर, पीएफआई के कई नेताओं की गिरफ्तारी व कोविड-19 के कारण लॉक डाउन के चलते साजिश टाल दी गई थी। उस साजिश को इसी फरवरी के अंत में अंजाम देना था।

एसटीएफ के अफसरों के अनुसार दोनों के पास इससे जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं। इनमें एक साल पहले की डायरी के पन्ने पर आतंकी हमले की योजनाबद्ध तरीके से तैयारी का जिक्र है। पीएफआई के कमांडर अंसद बदरुद्दीन और फिरोज खान ने एसटीएफ की पूछताछ में कुबूल किया है कि साल भर पहले ही भीड़ पर हमले की योजना थी। मगर संगठन के लोगों की गिरफ्तारी और कोरोना के कारण लोगों के बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई तो इसे टालना पड़ा।
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- फोटो : amar ujala
डायरी के पन्नों पर साजिश का खुलासा
दोनों के पास से डायरी का जो पन्ना मिला है वह जनवरी 2020 का है। इसमें कुछ अंग्रेजी व कुछ मलयालम भाषा में कोड वर्ड लिखा है। अंग्रेजी के कोड वर्ड को एसटीएफ व एटीएस ने डीकोड कर लिया है। मलयालम में लिखे कोड के लिए संबंधित भाषा के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया। दोनों के पास से एक पेन ड्राइव भी मिला है, जिसमें मलयालम में कई कोड वर्ड लिखे हैं।
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- फोटो : amar ujala
एक धमाके से साफ हो सकता है 30 मीटर का इलाका
एसटीएफ के मुताबिक, दोनों के पास मिला एक विस्फोटक एक बार में 30 मीटर के दायरे में बने हाई राइज बिल्डिंग को जमींदोज कर सकता है। इसे रिमोट व टाइमर से संचालित किया जाता है। विस्फोटक जैल व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से तैयार किया गया है। एसटीएफ को विस्फोटक सामग्री तो मिल गई है, लेकिन रिमोट डिवाइस नहीं मिला है। दोनों ने कुबूला है कि उन्होंने विस्फोटक बनाना बांग्लादेश में सीखा है।

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आतंकियों के पास से बरामद हुआ सामान। - फोटो : amar ujala
हिंदू संगठनों के विरोध करने वालों को देते थे सुरक्षा
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक पीएफआई कमांडरों ने कुबूल किया है कि वे हिंदू संगठनों का खुला विरोध करने वाले दूसरे संप्रदाय के लोगों को सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। इसके लिए दोनों ने दक्षिण भारत में हुई सलाउद्दीन शेख की हत्या का जिक्र किया। दोनों ने कहा कि सलाउद्दीन शेख संघ व हिंदू संगठनों का विरोध करता था। उसे हमने सुरक्षा देने की पेशकश की थी। हालांकि इससे पहले ही उसकी हत्या हो गई। उसके परिजनों ने हिंदू संगठनों पर आरोप लगाया है। पीएफआई उसके परिवार की सुरक्षा का इंतजाम कर रही है।
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एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने गिरफ्तारी पर प्रेस कांफ्रेंस की थी। - फोटो : amar ujala
छात्रों का करते थे ब्रेन वॉश
पीएफआई ने कई विंग बना रखे हैं। संगठन को निचले स्तर पर मजबूत करने के लिए छात्रों को जोड़ने के लिए स्टूडेंट फेडरेशन भी बना रखा है, जो स्कूल-कॉलेजों में सक्रिय है। संगठन के लोग छात्रों से मिलकर उनका ब्रेन वॉश करते हैं। इसके बाद उनको संगठन से जोड़ते हैं। इसी तरह एक मजबूत लीगल सेल भी बना रखा है, जो पूरे देश में सक्रिय है। हर प्रदेश में बड़ी मजबूत वकीलों की टीम तैयार की है, जो संगठन से जुड़े लोगों को पुलिस द्वारा पकड़ने पर तत्काल कानूनी सहारा लेना शुरू कर देता है। यह दोनों संगठन एक इशारे पर सक्रिय हो जाते हैं।
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- फोटो : amar ujala
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का निर्देश
पीएफआई के हर शहर में नेटवर्क हैं। वहां के बड़े नेताओं व समाजसेवियों की सूची बना रखी थी। एसटीएफ को मिले दस्तावेजों में करीब 400 नाम भी शामिल हैं, जो देश के कई शहरों से जुड़े थे। ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए संगठन के सदस्यों को निर्देश दिया गया था और बड़े नेताओं व समाजसेवियों के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर निगरानी रखनी थी। ताकि उनके हर कदम के बारे में जानकारी हासिल हो सके।
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- फोटो : amar ujala
उनको साफ निर्देश था कि ऐसे लोगों को फॉलो नहीं करना है। उनसे जुड़े लोगों के नेटवर्क पर नजर रखने से पूरी जानकारी मिल जाएगी। यहां तक अपना सोशल साइट बनाने के दौरान फोटो या सेल्फी की डीपी लगाने की साफ मनाही थी। दोनों ने सोशल मीडिया पर सक्रिय अपने संगठन के कई लोगों के नाम भी कुबूले हैं।
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