बोल बम के जयकारों से सावन के दूसरे सोमवार को शहर के तमाम शिवालय गूंज उठे। रिमझिम फुहारों के बीच भोर से ही शिव भक्त बाबा की पूजा-अर्चना को जुटे।
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हाथों में पूजा का थाल, गंगाजल व दूध लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी। किसी ने अपने आराध्य का जलाभिषेक किया तो किसी ने दूग्धाभिषेक।
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किसी ने फूल और बेल पत्रों से बाबा का शृंगार किया तो किसी ने धतूरा और भांग से। शहर का हर शिवालय सुबह से शाम तक हर हर महादेव..., बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा।
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राजेंद्रनगर महाकाल शिव मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे खुले। बाबा की उज्जैन महाकाल की तर्ज पर भस्म आरती हुई, जिसमें वायुसेना के लापता हुए हवाई जहाज के यात्रियों की घर वापसी की मंगलकामना की गई। (लखनऊ के मनकामनेश्वर मंदिर में पूजा करतीं महिलाएं।)
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मंदिर में जहां दिन भर रुद्राभिषेक और शृंगार का दौर चला तो बाहर मेले सा माहौल रहा। रिमझिम बारिश में भीगते श्रद्धालुओं ने भोर से मनकामेश्वर मंदिर में कपाट खुलने के बाद से देर रात तक दर्शन पूजन किए।
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शिव भक्तों ने भोर से शाम तक नि:शुल्क गंगाजल बांटा। डाक बम कांवड़ियों की ओर से पहली बार मंदिर में जलाभिषेक हुआ।
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बिठूर से कलश में गंगाजल लेकर 110 किलोमीटर की यात्रा कर जितेंद्र शर्मा, उमेश जोशी, पुष्कर सिंह समेत 50 भक्तों के दल ने बाबा का अभिषेक किया। बर्फ के शिवलिंग का अभिषेक सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में हुआ। (तस्वीर में एक मंदिर के बार)
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यहां पूजन के लिए आने वाले भक्तों को नि:शुल्क गंगाजल के साथ ही पूजन सामग्री दी गई और प्रसाद वितरण किया गया। गोमतीनगर के देवघर द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में कदंब के फूलों से महादेव का शृंगार हुआ।
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चौक स्थित मां पूर्वी देवी एवं महाकालेश्वर मंदिर बाघंबरी शक्तिपीठ में सुमन मिश्रा की अगुवाई में भक्तों ने शिव भजनों से मोहित किया।