फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दर्शकों ने छपाक को सराहा, बोले- बहिष्कार तो लड़कियों पर जुल्म करने वालों का होना चाहिए

Sat, 11 Jan 2020 04:00 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 7
फिल्म 'छपाक' देखने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू में नकाबपोश बदमाशों के हमले में घायल छात्र-छात्राओं का हालचाल लेने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के जाने के बाद विवादों में आई उनकी फिल्म छपाक को रिलीज के पहले ही दिन शुक्रवार को दर्शकों ने खूब सराहा। फिल्म में एसिड हमले की शिकार युवतियों को अभिनय का मौका मिलने पर दर्शकों ने खुशी जाहिर की। फिल्म के बहिष्कार को कई दर्शकों ने राजनीति करार देकर फिल्म से सबक लेने की बात कही।
विज्ञापन

2 of 7
अमिता त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ की अमिता  त्रिपाठी ने कहा कि फिल्म सच्ची घटना बयां कर रही है। ये फिल्म समाज की संवेदनहीनता को दर्शाती है तो वहीं लड़कियों को मुश्किल हालात में लड़ने का भी संदेश देती है। फिल्म के बहिष्कार से हमें कोई लेनादेना नही है।
 
विज्ञापन

3 of 7
बबिता - फोटो : अमर उजाला
बबिता ने कहा कि छपाक बेहतरीन फिल्म है। जो हमें बताती है कि बहिष्कार करना है तो लड़कियों के साथ इस तरह की हैवानियत करने वालों का किया जाए।
 

4 of 7
मिर्जा आदिल - फोटो : अमर उजाला
सीतापुर से सिर्फ फिल्म देखने आए मिर्जा आदिल ने कहा कि देश के तमाम इलाकों में एसिड हमले की घटनाएं कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में फिल्म एक साफ संदेश दे रही है कि एसिड की बिक्री पर सख्ती से रोक लगे ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
विज्ञापन

5 of 7
मोहम्मद आफताब - फोटो : अमर उजाला
सीतापुर से ही फिल्म देखने आए मो. आफताब ने कहा कि फिल्म काफी अच्छी है, सभी को देखनी चाहिए। फिल्म को लेकर विवाद पर उन्होंने कहा कि फिल्म एक सामाजिक मुद्दे पर है जबकि विरोध करने वाले राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेएनयू में हिंसा के शिकार छात्र-छात्राओं का हालचाल लेने जाने का फिल्म से क्या मतलब है। जिन लोगों पर हिंसा का आरोप है, वही लोग फिल्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
विज्ञापन

6 of 7
आलिया हैदर - फोटो : अमर उजाला
‘एसिड बुरी चीज है, किसी को न मिले’
आलिया हैदर कहती हैं कि फिल्म में एसिड फाइटर्स के जज्बातों को बेहद संजीदगी से पेश किया गया है। एसिड फाइटर्स समाज से सिर्फ प्यार चाहती हैं, लेकिन उन्हें घृणा की नजर से देखा जाता है। हमें उनके बीच प्यार बांटने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जेएनयू जाकर दीपिका ने कोई गलत काम नहीं किया। हिंसा की शिकार छात्र-छात्राओं की सुनने वाला कोई नहीं है तो किसी को तो जाना ही होगा। छह साल की आयतल हैदर फिल्म को अच्छी बताते हुए सिर्फ एक बात कहती हैं कि एसिड बहुत बुरी चीज है। ये किसी को नहीं मिलनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
सौम्या सिंह - फोटो : अमर उजाला
राजधानी की सौम्या सिंह ने कहा कि फिल्म में दीपिका सहित सभी कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया है। फिल्म में एसिड फाइटर्स की संवेदनाओं को काफी संवेदनशीलता से दर्शाया गया है। ऐसे में फिल्म के बहिष्कार का सवाल ही नहीं उठता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें