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आम बजट से उम्मीदें, युवा बोले- रोजगार दें, व्यापारियों ने कहा- जीएसटी दरें की जाएं संतुलित

Thu, 04 Jul 2019 04:41 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले पिछली कार्यकाल में ले चुकी मोदी सरकार से अब व्यापारी और मध्यम वर्ग महंगाई व जीएसटी की दरों में सुधार की उम्मीद लगाए है। लोगों का कहना है कि सरकार को अपने दूसरे कार्यकाल में बदलाव के फैसले लेने चाहिए। महिलाओं को उम्मीद है कि सोने पर टैक्स घटाकर इसे सस्ता किया जाएगा। वहीं व्यापारी ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों पर टैक्स बढ़ाए जाने की मांग रख रहे हैं। हेल्थ सेक्टर को पहले की तरह बढ़े हुए बजट की जरूरत है। पेश है बजट से लोगों की उम्मीदों पर एक रिपोर्ट :
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व्यापारी - फोटो : अमर उजाला
व्यापारियों को उम्मीद
ऑनलाइन कारोबार पर बढ़ें टैक्स

नोट बंदी व जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी उबर नहीं पाए हैं। ऑनलाइन कारोबार व्यापारी को नुकसान नुकसान पहुंचा रहा है। प्रधानमंत्री से उम्मीद कि ऑनलाइन कारोबार कंपनियों की टैक्स दरें बढ़ाएं जिससे व्यापारियों का इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार बंद न हो। खासतौर पर 32 इंच से अधिक एलईडी को 28 के बजाय 12 फीसदी जीएसटी के दायरे में लाएं।
- पवन, मुकेश तेजवानी, बिन्नी, मन्नू, सर्वेश, रितेश।
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व्याापारी - फोटो : अमर उजाला
इम्पोर्ट ड्यूटी घटाएं तो रुकेगी तस्करी
सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी 10 फीसदी व जीएसटी तीन फीसदी लगने से उसकी कीमत बढ़ गई है। इम्पोर्ट ड्यूटी अधिक होने से सोने की बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है। इससे एक नंबर में सोने को खरीद कर गहने बेचने वालों को उन लोगों से मुकाबला करना पड़ रहा है जो तस्करी के सोने से गहनों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। सोने की इम्पोर्ट ड्यूटी को 10 से घटाकर 4 फीसदी किया जाए।
- मनीष, गौरव, लक्ष्मी, नरेंद्र , बउवा सिंह। 

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परिवार को उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
परिवार को उम्मीद
ताकि किचन का बजट जेब पर न पड़े भारी
केंद्र सरकार से आशा है कि वे बजट में कुछ ऐसा प्रावधान करें कि किचन का बजट जेब पर भारी न पड़े। दैनिक जीवन के खाद्य पदार्थ आसमान छू रहे हैं। खासकर जो पदार्थ पैकेट में मिल रहे हैं। आजकल ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है लेकिन आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। हम लोग रियल एस्टेट के बिजनेस में हैं। कच्चा माल इतना महंगा हो चुका है कि बिजनेस ठप होता जा रहा है।
- सपना त्रिपाठी, उत्कर्ष त्रिपाठी, उर्वी त्रिपाठी, रेखा पांडेय, सुचित्रा तिवारी, सेजल तिवारी।
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परिवार को उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
टैक्स में मिले लाभ, जीएसटी दरें हों कम
हम लोग उच्च मध्यम वर्ग में आते हैं। किसी भी प्रकार का सब्सिडी नहीं लेते हैं तो केंद्र सरकार से आशा करते हैं कि कर में हमको लाभ मिले। इससे परिवार पर बोझ कम और महंगाई से राहत मिलेगी। हमारे वर्ग में मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च होता है। हम आशा करते हैं कि जीएसटी की दरें कम की जाएं ताकि व्यापार और बढ़े। ज्यादा अवसर प्राप्त हो सकें।
- चंद्रशेखर पांडेय, अंजली पांडेय, भार्गव पांडेय, अर्जुन पांडेय।
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युवाओं को उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
युवाओं को उम्मीद
सस्ती शिक्षा और रोजगार मिले

भारत विश्व का सबसे युवा देश है। ये युवा देश की तकदीर बदल सकते हैं, लेकिन सरकार को इनकी पढ़ाई व रोजगार के लिए काम करना होगा। बजट में हम उम्मीद करते हैं कि शिक्षा सस्ती व रोजगार सुलभ होेंगे। कॉलेज में परास्नातक स्तर पर सीटें बढ़ाने की जरूरत भी है। रोजगार सुलभ हों तो यहां के युवाओं को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जीडीपी बढ़ाने का काम करेगा।
- ऐश्वर्या तिवारी, राहुल गिरि, नवांशु सिंह, सुनील, समीर श्रीवास्तव।
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युवाओं को उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
सस्ते हों लैपटॉप, मुफ्त हो वाई-फाई
आज जमाना तकनीक का है। इसलिए युवाओं को तकनीक से जोड़ना चाहिए। लैपटॉप और सस्ते होने चाहिए। स्टूडेंट्स के लिए लैपटॉप में सब्सिडी भी दी जा सकती है। सभी विद्यार्थियों को निशुल्क वाई-फाई की सुविधा मिले। यह सुविधा उनके शैक्षणिक संस्थानों में हो सकती है। तकनीक का साथ मिलेगा तो युवाओं का विकास होगा।
-दीपक सिंह, अशोक कुमार प्रभात, गौरव पांडेय, विकास चौधरी, दीपक प्रियांशु

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डॉक्टरों को उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
सीएचसी-पीएचसी में बढ़ें चिकित्सकीय सेवाएं
नए बजट में मेडिकल का खर्च बढ़ना चाहिए। केंद्र सरकार ने जिस तरह गरीब मरीजों के लिए आयुष्मान योजना का लाभ दिया है। उसी तरह मध्यवर्गीय परिवार के लिए असाध्य बीमारियों की योजना हो। सीएचसी-पीएचसी में सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए ताकि बड़े अस्पतालों में मरीजों का लोड कम हो।
डॉ. डीएस नेगी- निदेशक सिविल अस्पताल, डॉ. आशुतोष प्रताप, डॉ. विवेक द्विवेदी, डॉ. अजय शर्मा समेत अन्य डॉक्टर।
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डॉक्टरों को उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
चिकित्साकर्मियों के हितों की झलक दिखे
बजट में चिकित्साकर्मियों के हितों की झलक दिखनी चाहिए। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाए। दवाओं का मद अलग हो और सर्जिकल सामानों का अलग। इससे चिकित्सकीय गुणवत्ता बढ़ेगी। नर्सिंग स्टॉफ और वार्ड बॉय के लिए प्रोत्साहन राशि का इंतजाम हो।
- डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. अशोक वर्मा, फार्मासिस्ट रहमान, डॉ. निशांत पवार।



 
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