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पल भर में उजड़ गईं सारी खुशियां, चार दिन पहले दी थी नए घर की पार्टी, दिसंबर में थी शादी

Tue, 09 Jul 2019 05:12 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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हादसे ने छीनीं खुशियां - फोटो : अमर उजाला
यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए जनरथ बस हादसे ने लखनऊ के 13 परिवारों की खुशियां छीन लीं। कई परिवारों ने किसी न किसी अपने को खोया है। हादसे की सूचना मिलते ही गोमतीनगर, चिनहट, काकोरी, कैसरबाग, इंदिरानगर, और मड़ियांव, रकाबगंज, कैंट, सरोजनीनगर में मृतकों के घर में कोहराम मच गया।
 
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हादसे ने छीनीं खुशियां - फोटो : अमर उजाला
.तो माता-पिता से यह अंतिम मुलाकात थी
त्रिवेणीनगर के निकट एकता पार्क निवासी अरविंद मिश्रा का बेटा हिमांशु (32)माता-पिता से मिलने लखनऊ आया था। यह उनकी आखिरी मुलाकात थी। आलूद स्कूल के मेन गेट के पास अरविंद मिश्रा का घर है। भतीजे रिशु ने बताया कि अरविंद मिश्रा का बेटा हिमांशु आईआईटी से इंजीनियरिंग और एमबीए करने के बाद दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर केपद पर तैनात था। उसकी शादी स्मृति मिश्रा से हुई थी। छह महीने का बेटा है। हाल ही में हिमांशु ने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर एक एनजीओ में काम शुरू किया था। हिमांशु का परिवार दिल्ली में रहता था। वह लखनऊ माता-पिता से मिलने आए थे। पिता अरविंद मिश्रा जलनिगम में स्टेनोग्राफर हैं। रविवार रात को वह जनरथ से दिल्ली जा रहे थे। बहन स्वेच्छा बंगलूरू में एक बैंक में मैनेजर के पद पर तैनात हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
छुट्टी पर घर आया था दीपक
काकोरी के पास मोहान रोड निवासी कुसुम सिंह को जब न्यूज चैनल के जरिए बड़े बेटे दीपक सिंह (30) की मौत की सूचना मिली तो वे बदहवाश हो गईं। पति की मौत के बाद दीपक ने पूरे परिवार को संभाल रखा था। डेढ़ साल पहले उसने नोएडा की एक कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वहीं, छोटा बेटा नीरज भी गुड़गांव के एक टेलीकॉम कंपनी में काम करता है। तीसरा बेटा सूरज और बेटी पूजा उनके साथ रहते हैं। पूजा ने बताया कि पिता महावीर प्रसाद शिक्षा विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद से रिटायर हुए थे। दीपक सप्ताहभर की छुट्टी लेकर घर आया था। परिवार के लोग उसकी शादी की बात कर रहे थे। रात 9.30 बजे दीपक नोएडा के लिए बस पर बैठा था। मां से बातचीत होने पर उसने सुबह पहुंचने पर कॉल करने की बात कही। सुबह बात नहीं हुई तो उसे कॉल की गई, लेकिन जवाब नहीं मिला। इस बीच एक न्यूज चैनल के जरिए दीपक की मौत की सूचना मिली। इस पर सूरज लखनऊ से व नीरज गुड़गांव से आगरा के लिए रवाना हो गए। कुसुम सिंह का पूरा परिवार उत्तराखंड का रहने वाला है।

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हादसे ने छीनीं खुशियां - फोटो : अमर उजाला
बेटे को लेकर महाकालेश्वर दर्शन के लिए जाना था
कैंट रोड कैसरबाग निवासी महावीर प्रसाद के बेटे सुशील अग्रवाल (48) की बस हादसे में मौत हो गई। उनकी शुभम सिनेमा केपास किराने की दुकान है। बेटा राघव अग्रवाल दिल्ली में एक निजी कॉलेज से बीटेक कर रहा है। रविवार को सुशील बेटे से मिलने दिल्ली जा रहे थे। परिवारीजनों के मुताबिक सुशील बेटे राघव के साथ दिल्ली से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर दर्शन करने के लिए जाते। वहां से बेटे को छोड़कर वापस घर आना था। परिवार में माता-पिता, पत्नी, दो भाई और उनका परिवार है। हादसे की सूचना मिलते ही घर पर लोगों का आना शुरू हो गया था। देर रात तक रिश्तेदार व परिचित उनके शव का इंतजार कर रहे थे।
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हादसे ने छीनीं खुशियां - फोटो : अमर उजाला
एनजीओ के काम से जा रहे थे, मौत कर रही थी इंतजार
गोमतीनगर के खरगापुर निवासी डॉ. मनीष सिंह (44) होम्योपैथ के चिकित्सक हैं। साथ ही वह एनजीओ भी चलाते थे। एनजीओ के काम से अक्सर दिल्ली जाते थे। रविवार को भी वह एनजीओ के काम के सिलसिले में जनरथ बस से दिल्ली जा रहे थे। पत्नी अंशू रानी सिंह, बेटी वंशिका और बेटा सारस्वत को पता नहीं था। वह रविवार रात को पिता के साथ अंतिम बार भोजन कर रहे हैं। पत्नी अंशू रानी मुताबिक दोपहर में आगरा पुलिस का फोन आया कि हादसे में मनीष की मौत हो गई। अंशू ने अपने परिवारीजनों को सूचना दी। परिवार के लोग आगरा शव लेने गए हैं।

 
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हादसे ने छीनीं खुशियां - फोटो : अमर उजाला
चार दिन पहले नए घर की पार्टी दी थी, दिसंबर में थी शादी
हादसे में मड़ियांव के केशवनगर-2 में अन्ना मार्केट के पास रहने वाले अधिवक्ता अंशुमान अवस्थी के बेटे अविनाश अवस्थी (30) की मौत हो गई। अविनाश एक बैंक में पीओ था। नया घर बनाने की खुशी में चार दिन पहले उन्होंने पार्टी दी थी, लेकिन हादसे ने उनकी सारी खुशियां छीन लीं। अंशुमान ने बताया कि बेटा रविवार रात जनरथ से दिल्ली जा रहा था। सुबह 11.30 बजे आगरा ट्रॉमा सेंटर से कॉल आया कि अविनाश हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया है। अंशुमान के करीबी बताते हैं कि उसकी शादी कानपुर की युवती से तय थी। दिसंबर में शादी की तारीख तय कर दी गई थी। परिवार में अविनाश का छोटा भाई अंकुर है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वीकेंड में आए थे घर, लौटते वक्त गई जान
आगरा/लखनऊ। बस हादसे में जान गंवाने वाले सरोजनी नगर निवासी सुधीर कुमार मिश्रा (50) पुत्र भोलानाथ दिल्ली में बीएसएनएल के एकाउंट सेक्शन में अधिकारी थे। शनिवार को घर आए थे। सोमवार को घर से वापस ड्यूटी पर लौट रहे थे। उनके परिवारीजनों ने बताया कि सुधीर वीकेंड पर अकसर घर आते थे और सोमवार को दिल्ली लौट जाते थे। सुधीर के बेटे उपेंद्र मुंबई में जॉब करते हैं तो बेटी नियंता दिल्ली में जॉब कर रही है। वहीं बाराबंकी के रहने वाले मुजम्मिल (35) पुत्र बेंचू निशांत गंज में कारपेंटर का काम करते थे। उनके साले इरशाद ने बताया कि मुजम्मिल दिल्ली में रहने वाली बहन और बहनोई से मिलने जा रहे थे। बहन ने कई दफा बुलाया था मगर वह जा नहीं सके थे। किसे पता था यह दुखद घटना होगी। परिवार में उनकी पत्नी आतिका और चार बच्चे हैं।

 

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पिता बोले- नहीं मिल पाए बेटे से यह टीस हमेशा रहेगी
गोमती नगर विस्तार स्थित सुलभ कॉलोनी में रहने वाले प्रेम प्रकाश के घर सोमवार को तड़के आगरा पुलिस ने फोन किया। बताया गया कि बस हादसे में उनके बेटे धीरज पांडेय (32) की मौत हो गई है। इसके बाद घर में कोहराम मच गया। मां गीता तो खबर सुनते ही गश खाकर गिर पड़ीं। पिता निढाल होकर घंटों बैठे शून्य को निहारते रहे। पड़ोसियों ने किसी तरह से उन्हें संभाला। पिता प्रेमप्रकाश के मुताबिक, धीरज अंबेडकरनगर में एक निजी कंपनी में काम करता था। वहीं से कंपनी के काम के लिए दिल्ली चला गया और घर भी नहीं आया। उससे आखिरी बार न मिल पाने की टीस जिंदगी भर रहेगी। प्रेमप्रकाश मूलरूप से उत्तराखंड के हल्द्वानी के रहने वाले हैं और घर के पास ही दुकान खोल रखी है।
 

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ड्यूटी पर जाते समय हुई मौत
सरोजनीनगर के आजादनगर निवासी मनोज परिवहन विभाग में कार्यरत थे। उनकी तैनाती नोएडा में थी। शनिवार को मनोज आजादनगर में रह रही मां और पत्नी से मिलने आए थे। परिवारीजनों के मुताबिक, वह रोडवेज की बस से ही नोएडा जाते थे। रविवार रात को वह जनरथ से नोएडा केलिए निकले। सुबह परिवारीजन उनकेफोन का इंतजार कर रहे थे। काफी देर तक मिलाते रहे लेकिन कोई जबाव नहीं मिला। दोपहर को हादसे में गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली। आगरा पहुंचने पर मौत की पुष्टि हुई। देर रात को उनका शव परिवारीजनों को सुपुर्द कर दिया गया।

 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
नौकरी ज्वाइन करने जा रहा था नोएडा
चिनहट के जगन्नाथपुरम कॉलोनी उत्तराधौना निवासी सिद्धार्थ (26 ) व उसकेपरिवारीजनों को क्या मालूम था कि यह नौकरी उनकी सारी खुशियां छीन लेगी। सिद्धार्थ रविवार को लखनऊ से नौकरी ज्वाइन करने नोएडा जा रहा था कि रास्ते में एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई। सिद्धार्थ की मां किरन के मुताबिक, 15 दिन पहले उसे नोएडा की निजी कंपनी ने जॉइनिंग लेटर भेजा था। किरन एक निजी अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। जबकि पति राजेश दुबे एक प्लाइवुड फैक्ट्री में मजदूर हैं। घर की आर्थिक स्थित ठीक नहीं है। किसी तरह बेटे को बीटेक कराया था। छोटा बेटा शांतनु 11वीं का छात्र है। किरन के मुताबिक, वह लोग मूलरूप से गोंडा के रहने वाले हैं।
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