नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा से भी पास हो गया। इसपर देश भर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ जगहों पर इसको लेकर विवाद भी हो रहे हैं। लखनऊ में भी इस बिल को लेकर जहां कुछ लोग चिंता जता रहे हैं तो कुछ इसका समर्थन कर रहे हैं। यानी यहां भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं।
संविधान की आत्मा के खिलाफ बिल
यह बिल पूरी तरह से संविधान की आत्मा के खिलाफ है। सरकार अपने एजेंडे को किसी भी तरह से लागू कर रही है। उसकी कोशिश मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की है। सीएबी और एनआरसी जैसी चीजें इसी साजिश के तहत लाई गई हैं। - मौलाना मुफ्ती अबुल इरफान मियां फरंगी महली, सुन्नी धर्म गुरु
संविधान में मिला हुआ बराबरी का हक
नागरिकता संशोधन बिल भेदभाव से भरा हुआ है। पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैर मुस्लिम को नागरिकता दे रहे हैं। इसी तरह से बर्मा से आने वाले वहां के अल्पसंख्यकों को भी नागरिकता देनी चाहिए। क्योंकि हमारे देश का संविधान सभी को बराबरी का हक देता है । इस बिल में संविधान को पूरी तरह से अनदेखा किया गया है। - मौलाना सैफ अब्बास, शिया धर्मगुरु
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महर्षि सुषैन
- फोटो : अमर उजाला
नागरिक संशोधन बिल पर आम नागरिक सहमत
केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन बिल पर उठाए गए कदम से आम नागरिक सहमत है। राज्य सभा से इसे मंजूरी मिलने के बाद भारत की भारतीयता इस कदम से तय हो सकेगी। नागरिकता संशोधन बिल कांग्रेस के ताबूत में एक कील की तरह है जिसने हमेशा नागरिकों को बांटने का काम किया। - महर्षि सुषैन, भविष्यवक्ता व सामायिक मामलों पर टिप्पणीकार
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महंत देव्या गिरि
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सरकार का सकारात्मक और सही कदम
कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार का यह सकारात्मक और सटीक कदम है। बिल को लेकर देश में जो असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है, उन भ्रामक बातों से लोगों को बचने की जरूरत है। हमारे इन तीनों पड़ोसी मुल्कों में ही नहीं, अगर किसी मुल्क में हिदू भाइयों पर वहां धार्मिक अत्याचार हो तो उन्हें भारत की नागरिकता सरकार को देनी चाहिए, सरकार वही कर रही है। - महंत देव्या गिरि, मनकामेश्वर मंदिर डालीगंज
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डाॅ मनीष
- फोटो : अमर उजाला
बिल के समर्थन और विरोध से पहले चिंतन की जरूरत
नागरिकता संशोधन बिल पर इस समय चारों तरफ राजनीति हावी है। हमें इसका विरोध और समर्थन करने से पहले समझना जरूरी है। भारत में जो मुसलमान रह रहे हैं वे हमारे भाई हैं, लेकिन अन्य देश के मुसलमान उस राष्ट्र के नागरिक हैं। भारत और नेपाल को छोड़कर अन्य सभी देश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। अगर उस देश में उन पर जुल्म होते हैं तो फिर वे कहा जाएंगे। मानवाधिकार के लिहाज से यह बात सोचनी होगी। - डॉ. मनीष हिंदवी, शिक्षक, विद्यांत हिंदू डिग्री कॉलेज
मिल सकेगा मान सम्मान
सरकार का ये कदम सराहनीय है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आए दिन सिख, हिंदू को लेकर जो हिंसात्मक, गैर बराबरी की खबरें आया करती थीं, अब कम से कम यहां उनको मान सम्मान मिल सकेगा। वहां प्रताड़ित होकर भारत आए लोगों के लिए नागरिकता के नियम आसान हो रहे हैं। इससे एक अच्छा संदेश जाएगा कि भारत का दिल बहुत बड़ा है। - सरदार संपूर्ण सिंह बग्गा, अध्यक्ष गुरुद्वारा मानसरोवर कानपुर रोड