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गर्भ मे शिशु के आने से पहले ही मां-पिता कराएं इस बीमारी की जांच, सुरक्षित रहेगा बच्चा

Tue, 08 May 2018 04:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : डेमो
गर्भधारण से पहले थैलेसीमिया कैरियर की जांच करा कर होने वाले शिशु को इससे बचाया जा सकता है। 
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डेमो - फोटो : डेमो
खून न बनने की बीमारी थैलेसीमिया माता-पिता से बच्चों में आती है। इसलिए गर्भधारण करने से पहले माता-पिता में इस बीमारी के कैरियर की मौजूदगी की जांच करानी चाहिए। यदि एक बार थैलेसिमिक बच्चे का जन्म हो गया तो उसे जीवन भर खून चढ़ाना पड़ता है क्योंकि इस बीमारी में खून नहीं बनता है। 
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doctors
समय पर खून न चढ़ाने से मरीज की मौत भी हो सकती है। संजय गांधी पीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की हेड प्रो. शुभा फडके के अनुसार, थैलेसीमिया का पता सिर्फ मात्र पांच सौ रुपये खर्च करके लगाया जा सकता है। इसमें मां व पिता की जांच की जाती है। दोनों इस बीमारी के कैरियर है तो बच्चे को भी थैलेसीमिया होने की आशंका होती है। इसलिए माता-पिता बनने से पहले दंपती को थैलेसीमिया जांच करानी चाहिए।

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डेमो - फोटो : डेंमो
हीमोग्लोबिन ए-2 जांच से पता लगाया जा सकता है कि मां या पिता थैलेसीमिया के कैरियर तो नहीं हैं। इसके अलावा इस बीमारी का पता लगाने का कोई तरीका नहीं है। इसी जांच से जानलेवा अनुवांशिक बीमारी से बच्चे को बचाया जा सकता है। हर गर्भवती को खून की जांच कर ये पता लगाना चाहिए कि कहीं मां इस बीमारी की कैरियर तो नहीं। 
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- फोटो : डेमो
यदि मां कैरियर निकलती है तो फिर पिता की जांच भी करायी जाती है। यदि दोनों ही थैलेसीमिया के कैरियर निकलते हैं तो गर्भस्थ की तीन माह के अंदर खून की जांच की जाती है। यदि बच्चा बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो परिवार को गर्भपात कराने की सलाह दी जाती है। संजय गांधी पीजीआई में हीमोग्लोबिन ए-2 जांच की सुविधा उपलब्ध है। परीक्षण में दोनों में इसका स्तर बढ़ा मिले तो होने वाले बच्चे में मेजर थैलेसीमिया की आशंका 20 प्रतिशत रहती है। 
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- फोटो : डेमो
जरूरी है जेनेटिक काउंसलिंग-
- परिवार में पहले किसी बच्चे में पैदाइशी विकृति हो
- पहले से किसी को थैलेसीमिया, हीमोफीलिया हो
- परिवार में कोई मंदबुद्धि बच्चा या व्यक्ति हो
- माता-पिता दोनों ही किसी अनुवांशिक बीमारी के वाहक हों
- गर्भधारण करते समय महिला की उम्र 35 साल से अधिक हो
 
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- गर्भधारण के बाद मिर्गी की दवा खाई हो या फिर कोई संक्रमण हो गया हो
- परिवार में जन्मजात मृत शिशु पैदा हुआ हो
- परिवार के एक से अधिक सदस्य एक जैसी ही बीमारी से ग्रस्त हों
- महिला का पति के परिवार से खून का रिश्ता हो
- गर्भ की अल्ट्रासाउंड जांच में किसी खराबी का पता चला हो
- आंत की बनावट में खराबी हो
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- फोटो : डेमो
डॉक्टरों को भी ध्यान रखना होगा
- गर्भवती से परिवार में बीमारियों का इतिहास पूछें
- पति-पत्नी दोनों की थैलेसीमिया जांच जरूर कराएं
- 16 सप्ताह का गर्भ होने पर ट्रिपल टेस्ट कराएं
- 16 से 18 सप्ताह में अल्ट्रासाउंड से विकृतियों की पहचान करें
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