‘मैंने रोते हुए पोछे थे किसी दिन आंसू, मुद्दतों मां ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।’, ‘ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया, मां ने आंखें खोल दीं घर में उजाला हो गया।’, ‘जरा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाए, दीये से मेरी मां मेरे लिए काजल बनाती है।’
मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने मां की जिस तासीर को अपने अशआरों में पिरोया, उसी एहसास को स्कूली बच्चों ने रंगों की मदद से कागज पर उतारकर दिल जीत लिया।
स्कूली बच्चे अपनी भावनाओं को ‘अमर उजाला’ की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत शनिवार को लोहिया पार्क में मदर्स डे के उपलक्ष्य में आयोजित ड्रॉइंग कॉम्पटीशन में मां को कागज पर उतार रहे थे। सैकड़ों बच्चों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। किसी ने मां की सौम्यता, सरलता व मातृत्व को रंगों में पिरोया तो किसी ने मां के संघर्ष व जिजीविषा को कागज पर उतारा।
सुबह सात बजे से ही स्कूली बच्चों का आगमन पार्क में शुरू हो गया था। एम्फीथिएटर में जगह फुल हो जाने के बाद बच्चों ने पार्क में पेड़ों की छांव में चित्रकारी करनी शुरू की। प्रतियोगिता में पचास से अधिक स्कूलों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया था।
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मदर्स डे
- फोटो : amar ujala
पहली श्रेणी प्राइमरी में कक्षा तीन से पांच तक के बच्चे शामिल हुए। जूनियर वर्ग में कक्षा छह से आठ तक और सीनियर वर्ग में कक्षा नौ से 12 तक के बच्चों को शामिल किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महापौर संयुक्ता भाटिया उपस्थित रहीं।
उन्होंने स्कूली बच्चों को उत्साहवर्धन किया और उनके साथ तस्वीर खिंचवाई। इसके अतिरिक्त जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार भी मौजूद रहे। आगे देखें तस्वीरें...