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11 महीने की ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों के व्यवहार में किए बदलाव, आया चिड़चिड़ापन, ये हुए बदलाव

Wed, 17 Feb 2021 12:35 PM IST
ishwar ashish अभिषेक सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : सोशल मीडिया
घर पर 11 महीने की ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद जूनियर कक्षा के छात्रों का आत्मविश्वास डगमगा गया है। उनकी याद करने की क्षमता तो कम हुई है, लिखने की रफ्तार भी काफी घट गई है। छात्र थोड़े चिड़चिड़े भी हो गए हैं। स्कूल खुलने के बाद ऑफलाइन क्लास में शिक्षकों को बच्चों में ये बदलाव देखने को मिले। अब शिक्षक लर्निंग और राइटिंग के आधार पर होमवर्क दे रहे हैं ताकि वे फिर से पुरानी लय में लौट सकें।

जूनियर कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई कोरोना की वजह से पिछले साल मार्च में बंद हो गई थी। करीब 11 महीने बच्चों ने घर में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की। ऑनलाइन पढ़ाई का माहौल क्लास के माहौल से बिल्कुल उलट रहा। जहां पूरी क्लास एक शिक्षक के निगरानी में पढ़ती थी, वहीं ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चे आराम से पढ़ते थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
बच्चों में अनुशासन भी देखने को नहीं मिला। एक तरफ जहां वे करीब पांच घंटे टिक कर क्लास में पढ़ते थे वहीं, ऑनलाइन क्लास में एक दिन में ज्यादा से ज्यादा तीन से चार क्लास कर पाते थे। 10 फरवरी से जूनियर कक्षाओं की ऑफलाइन पढ़ाई फिर से शुरू हुई। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की न केवल व्यावहारिक बल्कि शैक्षिक क्षमता भी प्रभावित हुई है। अब अगली कक्षा में जाने से पहले छात्रों की क्षमता का विकास करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
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प्रधानाचार्या रिचा खन्ना - फोटो : amar ujala
बच्चों को तीन घंटे सीट पर बैठाए रखना बना चुनौती  
वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या रिचा खन्ना ने बताया कि बच्चों में अनुशासन की कमी देखने को मिल रही है। पढ़ते वक्त बच्चे इधर-उधर ज्यादा देखने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चों में थोड़ी उत्सुकता है दोस्तों से मिलने की। शिक्षकों को उन्हें तीन घंटे तक सीट पर बैठाए रखने के लिए जुगत लगानी पड़ रही है। होमवर्क में बच्चों की लिखने की स्पीड बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

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प्रधानाचार्या जतिंदर वालिया - फोटो : amar ujala
एक्टिविटी बेस्ड पढ़ाई से बढ़ा रहे आत्मविश्वास
अवध कॉलेजिएट की प्रधानाचार्या जतिंदर वालिया ने बताया कि बच्चों की याददाश्त थोड़ी कमजोर हो गई है। ऐसे में आत्मविश्वास की कमी के चलते बच्चे उत्तर देने में हिचक रहे हैं। तीन घंटे लगातार बैठे रहने पर कभी-कभी चिढ़ जाने की वजह से कहना भी नहीं मान रहे हैं। कोई टॉपिक भी पूरा याद नहीं कर पा रहे हैं। लिखने की स्पीड भी काफी कम हो गई है। बताया कि क्लास में एक्टिविटी बेस्ड पढ़ाई कराई जा रही है ताकि लिखने की स्पीड बढ़े और याददाश्त तेज होने के साथ आत्मविश्वास भी लौटे।
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प्रधानाचार्य मनीषा अंथवाल - फोटो : amar ujala
छोटे-छोटे मॉक टेस्ट से डलवा रहे जल्दी लिखने की आदत
दिल्ली पब्लिक स्कूल एल्डिको की प्रधानाचार्य मनीषा अंथवाल ने भी बच्चों की कम हुई लिखने की क्षमता पर चिंता जताई है। बच्चों की ज्यादा देर तक लिखने की आदत कम हो गई है। इसके लिए छोटे-छोटे मॉक टेस्ट कराए जा रहे हैं ताकि एक निर्धारित समय में जल्दी लिखने की आदत डालें।
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डॉ. सीबीपी वर्मा - फोटो : amar ujala
क्लास में नहीं दिख रहा बच्चों का रिस्पॉन्स
प्रधानाचार्य, केवी गोमतीनगर, डॉ. सीबीपी वर्मा ने बताया कि बच्चों की कॉपियां देखी गईं तो सामने आया कि अधिकांश ने खराब व अधूरा कार्य किया है। इससे साफ जाहिर है कि ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चों में लिखने के प्रति दिलचस्पी कम हुई है। क्लास में बच्चों का ज्यादा रिस्पॉन्स भी देखने को नहीं मिल रहा।
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसे बढ़ाई जा रही क्षमता
- रिवीजन के दौरान छोटे-छोटे मॉक टेस्ट लिए जा रहे हैं। ताकि याद करने की क्षमता बढ़े।
- लिखने की आदत डालने के लिए एक्टिविटी बेस्ड पढ़ाई कराई जा रही है।
- लिखने और याद करने के होमवर्क ज्यादा दिए जा रहे हैं।
- खोया आत्मविश्वास लौटोने के लिए कराई जा रही खूब रीडिंग।
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