संस्कृत के श्लोंकों में ढली और बाईं से दाई ओर को पढ़ी जाने वाली गीता शुक्रवार को नए रूप और नए अंदाज में ढलकर उतरी।
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शिकस्त के बाद आध्यात्म की शरण में अखिलेश
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नामचीन शायर अनवर जलालपुरी की 32 सालों की मेहनत का अनूठा अंदाज जब उर्दू शायरी में झलका तो उनका चाहने वाला हर एक शख्स उसे चंद लम्हे सुनने के बाद ही मुरीद हो गया।
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इस मौके पर मौलाना कल्बे सादिक भी पहुंचे। उन्होंने संत मोरारी बापू से लंबी गुफ्तगू भी की।
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प्रख्यता कवि और गीतकार गोपालदास नीरज भी इस मौके पर उपस्थित थे।
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लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद पहली बार सीएम अखिलेश यादव किसी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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गीता को उर्दू में ढालने पर अनवर जलालपुरी को हर किसी ने बधाई दी।
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अखिलेश यादव ने कहा कि गीता को उर्दू शायरी में ढालकर जलालपुरी ने एक बड़ा काम किया है।
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उन्होंने कहा कि गीता से ही गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार मिला था, ये एक ऐसा
ग्रंथ है जिस हर कोई पढ़ता है। जितनी बार पढ़ा जाये सोचने को कुछ नया
मिलता है।