इंजीनियरिंग, कॉमर्शियल व मैकेनेकिल से लेकर ऑपरेटिंग तक हर विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों का बोलबाला है।
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भ्रष्टाचार से रेलवे की हालत खराब है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट में यह बातें सामने आई हैं। उसने उत्तर रेलवे को इस मामले में पहले नंबर पर रखा है।
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एसी बोगियों में कूलिंग ठप होना, ट्रैक के दोहरीकरण में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल और यात्री सुविधाओं के कामों में कमीशनखोरी में उत्तर रेलवे अव्वल है। सीवीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन साल के दौरान रेल कर्मियों और अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के कुल 18,600 मामले दर्ज हुए हैं।
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इसमें 6,121 मामलों के साथ उत्तर रेलवे टॉप पर है। दूसरे स्थान पर दक्षिण रेलवे है जहां भ्रष्टाचार के 1,955 मामले दर्ज हैं। सीवीसी ने भ्रष्टाचार से जुड़ी यह रिपोर्ट बीते हफ्ते संसद में पेश की है। वर्ष 2016-17 में रेलवे पर भ्रष्टाचार के कुल 11,200 मामले दर्ज हुए थे।
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इसमें 8852 मामलों को निपटा दिया गया था, जबकि 2348 केस लंबित हैं। 1054 मामले ऐसे हैं, जो छह महीने से अधिक समय से लंबित हैं। सीवीसी की रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार की मुख्य वजह है अफसरों और यूनियन पदाधिकारियों का एक ही मंडल में वर्षों तक डटे रहना। मसलन, उत्तर रेलवे में लखनऊ, दिल्ली, मुरादाबाद, फिरोजपुर व अम्बाला पांच मंडल हैं।
जहां लाखों रेलकर्मी काफी दिनों से तैनात हैं। उत्तर रेलवे में भ्रष्टाचार की शिकायतों का हाल यह है कि विजिलेंस की रिपोर्ट पर कार्रवाई तक नहीं होती। सूत्रों की मानें तो मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कार्मिक व स्टोर विभाग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हैं।