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डॉक्टर ने महिला को दी नई जिंदगी, बिना हड्डी काटे महज 3.5 सेंटीमीटर चीरा लगा रीढ़ को किया सीधा

Wed, 20 Nov 2019 03:16 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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ऑपरेशन के बाद ठीक हुई महिला, यूं तिरछी हो गई थी रीढ़ की हड्डी, सर्जरी से इस तरह किया सीधा - फोटो : अमर उजाला
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के न्यूरो सर्जन ने रीढ़ की हड्डी तिरछी होने की वजह से चलने फिरने में असमर्थ महिला को मिनिमल इनवेसिव सर्जरी के जरिये फिर से चलने लायक बना दिया है। खास बात है कि इस सर्जरी में रीढ़ को सीधा करने के लिए उसकी हड्डी नहीं काटनी पड़ी। महज 3.5 सेंटीमीटर के चीरे से टेढ़ी रीढ़ को सीधा कर दिया गया। सर्जरी के दूसरे दिन ही महिला चलने फिरने लगी।
केस स्टडी : सात साल से पीठ में दर्द रहता था
राजधानी निवासी 59 वर्षीय मंजू को करीब सात साल से पीठ में दर्द रहता था। चिकित्सकों को दिखाया तो वे सिंकाई और दर्द की दवाएं देते रहे। दवा खाने के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया। दोनों पैरों में भी दर्द रहने लगा। स्थिति यह हो गई कि वह 50 मीटर चलने में भी असमर्थ हो गईं।


Only 3.5 cm without cutting. Made the spine straight with an incision
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एक्स-रेः .यूं तिरछी हो गई थी रीढ़ की हड्डी - फोटो : अमर उजाला
जांच रिपोर्ट : रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने से नसों पर बन रहा था दबाव
 मंजू डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचीं तोन्यूरो सर्जन डॉ. राकेश कुमार सिंह ने उनकी जांच की। एक्स-रे, सीटी स्कैन रिपोर्ट देखने के बाद पता चला कि उनकी स्पाइन में समस्या है। रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने की वजह से नसों पर भी दवाब बन रहा है। स्पाइन का दर्द पैरों तक पहुंच रहा है। इसके बाद तय किया गया कि उनकी सर्जरी की जाएगी।
of lohia hospital gave new life to pregnant lady and her baby
 
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सर्जरी से इस तरह रीढ़ को किया सीधा - फोटो : अमर उजाला
पीठ के बजाय पेट की तरफ से की सर्जरी
डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि हमने मरीज की मिनिमल इनवेसिव स्पाइन सर्जरी (एमआईएसएस) तकनीक से सर्जरी का फैसला किया। इसमें पेट की तरफ से छाती के नीचे वाले हिस्से से चीरा लगाकर स्पाइन तक पहुंचा गया। यहां तक पहुंचने के लिए सिर्फ 3.5 सेंटीमीटर का चीरा लगाया गया। इसमें रीढ़ की हड्डी को काटा भी नहीं गया। चीरे वाले स्थान से सर्जिकल उपकरण को स्पाइन तक ले जाया गया। फिर स्पाइन में क्लैंपनुमा उपकरण लगाकर रीढ़ को सीधा कर दिया गया। यह प्रयोग पहली बार किया गया है।
 

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डॉ राकेश - फोटो : अमर उजाला
इसलिए खास ये सर्जरी
बदला सर्जरी का तरीका
डॉ. राकेश कुमार सिंह का दावा है कि अभी तक पीठ के रास्ते यह सर्जरी की जाती थी, जिसमें रीढ़ की हड्डी को काटना पड़ता था। फिर टेढ़े हुए हिस्से को निकालकर अथवा सीधा करकेफिट किया जाता था। करीब तीन घंटे चली सर्जरी में एक यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ी। इस विधि से सर्जरी के दूसरे दिन ही महिला चलने फिरने लगी। उसका पांच दिन तक रिहैबिलिटेशन कराया गया। इसके बाद उसे छुट्टी दे दी गई। अब फॉलोअप में बुलाया गया है।

खर्च निजी अस्पतालों के मुकाबले करीब एक तिहाई ही आया
 डॉ. राकेश का दावा है कि संस्थान में यह सर्जरी करीब 2.5 लाख में हुई, जबकि दिल्ली व अन्य शहरों के  प्राइवेट अस्पतालों में करीब 7.5 लाख खर्च आता है। डॉ. राकेश का यह भी दावा है कि इस तरह से प्रदेश में पहली बार सर्जरी की गई है।
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ऑपरेशन के बाद ठीक हुई महिला - फोटो : अमर उजाला
सलाह आपके काम की...
क्यों होती है रीढ़ की हड्डी तिरछी?

डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है अथवा रीढ़ में किसी तरह की चोट लग जाती है, उनमें रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है। बढ़ती उम्र की वजह से भी यह समस्या आती है। बढ़ती उम्र की वजह से ही मंजू की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गई थी। हड्डी टेढ़ी होने पर जब लोग झुककर चलने लगते हैं तो वह उसी तरफ टेढ़ी होती चली जाती है।

कैसे करें बचाव
रीढ़ की हड्डी तिरछी होने से बचने के लिए कैल्शियम का भरपूर प्रयोग करें। रीढ़ के किसी भी हिस्से में दर्द है तो विशेषज्ञ को दिखाएं। यदि रीढ़ का दर्द पैर अथवा कमर की ओर बढ़ रहा है तो सावधान हो जाएं और चिकित्सक से सलाह लें।
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