देश के मेडिकल संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित नीट 2020 परिणाम में लखनऊ के मेधावियों ने सफलता की कहानी गढ़ी है। परीक्षा परिणाम शाम को जारी किया गया, हालांकि वेबसाइट डाउन होने की वजह से अभ्यर्थी रात को ही अपने परीक्षा परिणाम देख पाए। करीब 3 से 4 घंटे तक अभ्यर्थी अपना परीक्षा परिणाम जानने के लिए वेबसाइट पर जूझते रहे। अभ्यर्थियों ने बताया कि जैसे ही वह अपना रोल नंबर और जन्मतिथि वेबसाइट पर अंकित करते थे, उस पर एरर लिखकर आ जाता था। ना अंक दिखता था और ना ही रैंक।
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सुमेधा सिंह
- फोटो : अमर उजाला
रटें नहीं, कॉन्सेप्ट क्लीयर रखें
कुल अंक 675, ऑल इंडिया रैंक 884
मेरा मानना है कि रटकर कोई परीक्षा पास नहीं की जा सकती है। मैंने नीट की परीक्षा में इसका ध्यान रखा है। मुझे इसका फायदा मिला। इस सफ लता में मेरे घरवालों ने काफी सहयोग किया है। मेरे पिता चंद्रमोहन सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर तैनात हैं। डॉक्टर बनकर मैं लोगों की सेवा करना चाहती हूं तथा अपने देश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर देखना चाहती हूं।
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मुराद अली
- फोटो : अमर उजाला
किसान के बेटे ने किया नाम रोशन
रैंक: 2329
मूल रूप से मैं लखीमपुर खीरी गोला कोटवारा गांव का रहने वाला हूं। यह मेरा दूसरा प्रयास था। कुल 720 में से 660 अंक हासिल किए हैं। दो साल से लखनऊ में रहकर तैयारी कर रहा था। मैं लोगों की सेवा करना चाहता हूं। मेरे मामा डॉक्टर हैं, उन्हीं से मैंने प्रेरणा ली। मैं रैगुलर टेस्ट देता था, टीचर्स से शंकाएं दूर करता था। कोचिंग के अलावा हॉस्टल में रहकर सेल्फ स्टडी भी करता था। सेल्फ नोट्स से काफी मदद मिली। पिता जाबिर अली किसानी करते हैं और मां अफरोज बेगम गृहिणी हैं।
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एकता ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
मां ने तैयारी में खूब मदद की
रैंक: 3639
शिक्षकों के मार्गदर्शन और घर पर पाठ्य विषयों के लगातार अभ्यास की बदौलत मैंने सफलता हासिल की है। मैं लविवि ओल्ड कैंपस में रहती हूं। मां गीता ठाकुर मेरी तैयारी में मदद करती थीं। वे लविवि की लॉ फैकल्टी में कार्यरत हैं। मैं नोट्स बनाती थी और समय-समय पर अभ्यास करती थी। कोलकाता में मेरे चचेरे भाई सौरभ ठाकुर डॉक्टर हैं। उन्हीं से डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। उन्होंने मुझे खूब प्रोत्साहित किया।
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अतुल्य सोनी
- फोटो : अमर उजाला
घरवालों का योगदान
651 अंक
रैंक: 3699
मेरा लक्ष्य केजीएमयू जैसे श्रेष्ठ संस्थान से एमबीबीएस करने के बाद न्यूरो सर्जन बनकर लोगों की सेवा करना है। मेरे पिता राजेश कुमार सोनी जनपद बहराइच में सहायक चकबंदी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। पिता के साथ ही बहन आस्था सोनी और मां सोनम सोनी का बहुत योगदान है।
परिवार में दोगुनी खुशी
रैंक: 3770
मैं मूल रूप से श्रावस्ती जिले का रहने वाला हूं और 2 साल से लखनऊ में रहकर तैयारी कर रहा था। मैंने मॉक टेस्ट और सेल्फ स्टडी के बल पर सफलता प्राप्त की है। पिता अखिलेश मिश्रा अधिवक्ता है और मां अर्चना मिश्रा परिषदीय विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं। शुक्रवार को दोगुनी खुशी मिली। जहां मेरा नीट में चयन हो गया, वहीं मां को नियुक्ति पत्र भी मिल गया।