अलविदा की नमाज के साथ ही रमजान-उल-मुबारक के विदा होने का एलान हो गया। एक ओर इबादत के ईनाम के तौर पर मिलने वाली ईद की खुशी थी तो दूसरी ओर रमजान की बरकतों के विदा होने का गम। लिहाजा रोजेदारों ने शुक्रवार को रमजान-उल-मुबारक को नम आंखों से विदाई दी। राजधानी में टीले वाली मस्जिद और आसिफी मस्जिद में सैकड़ों की तादाद में सुन्नी व शिया मुसलमानों ने नमाज अदा की। वहीं, शिया समुदाय के लोगों ने नमाज पढ़ने के बाद लखनऊ के बड़े इमामबाड़े पर तिरंगा झंडा फहराया।
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इस मौके पर फिलिस्तीन में इजराइलियों समेत पूरी दुनिया से जुल्म के खात्मे और मुसलमानों की हिफाजत के साथ ही देश में अमन व खुशहाली की दुआएं की गई। इसके अलावा ईद मीलादउन्नबी और अलविदा का अवकाश बहाल करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई।
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टीले वाली मस्जिद पर अलविदा की नमाज मस्जिद के इमाम मौलाना शाह फजलुल मन्नान रहमानी ने अदा कराई। (अलविदा की नमाज अदा करते शिया समुदाय के लोग।)
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नमाज के बाद मौलाना ने फिलिस्तीन समेत दुनिया में चल रहे खून खराबे के लिये इस्लाम की दुश्मन ताकतों को जिम्मेदार ठहराते हुये जालिमों के खात्मे के लिए दुआ मांगी। वहीं आसिफी इमामबाड़े में अलविदा की नमाज के बाद शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने शिया सुन्नी एकता के लिए दुआ मांगी।
मौलाना ने कहा कि शिया व सुन्नी में फूट डालने की साजिश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। फिलिस्तीन में इजराईल के जुल्म का जिक्र करते हुए मुसलमानों के पहले किब्ला बैतुल मुकद्दस की इजराइलियों से आजादी की मांग की। (बड़े इमामबाड़े पर नमाज पढ़ने के बाद झंडा फहराते मुस्लिम समुदाय के लोग।)