नाटक का निर्देशन एवं रूपांतरण वरिष्ठ रंगकर्मी के के अग्रवाल द्वारा किया गया। अपने बच्चे की जान बचाने के लिए व्याकुल, मंदिर में प्रवेश करने को छटपटाती सुखिया के चरित्र को सीमा मोदी ने अपने अभिनय से जीवंत किया। उनका साथ दिया पुजारी के रूप में पियूष सिंह ने। नाटक में गांव वालों के रूप में आशीष पांडे, यश गुप्ता, रजत दीक्षित, ई राजेश, शुभम, दीपक एवं प्रत्यूष उपाध्याय ने अपनी भूमिका से न्याय किया।