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'बेटे की सलामती में चोरी छुपे मंदिर गई सुखिया को पीटा, जियावन को भी मार दिया'

Tue, 31 Jul 2018 11:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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गरीब विधवा सुखिया के पति ने सपने में आकर उसे मंदिर जाकर बीमार बेटे की सलामती के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी। लेकिन धर्म के ठेकेदार उसे अछूत कहकर मंदिर में जाने नहीं देते। जिस पर वो जब चोरी छिपे मंदिर में प्रवेश की कोशिश करती है तो उसे लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा जाता है। इस हादसे में सुखिया तो घायल होती ही है। उसका बच्चा जियावन मर जाता है।
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इस ह्रदयविदारक कहानी 'मंदिर' का मंचन मुंशी प्रेमचंद्र की 139वीं जयंती पर भारतेंदु नाट्य अकादमी में आयोजित प्रेमचंद्र स्मृति समारोह में मंगलवार को किया गया। इस कहानी के माध्यम से समाज में व्याप्त छुआ-छूत और धर्म पर एक वर्ग के कब्जे को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से उठाया गया।
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नाटक का निर्देशन एवं रूपांतरण वरिष्ठ रंगकर्मी के के अग्रवाल द्वारा किया गया। अपने बच्चे की जान बचाने के लिए व्याकुल, मंदिर में प्रवेश करने को छटपटाती सुखिया के चरित्र को सीमा मोदी ने अपने अभिनय से जीवंत किया। उनका साथ दिया पुजारी के रूप में पियूष सिंह ने। नाटक में गांव वालों के रूप में आशीष पांडे, यश गुप्ता, रजत दीक्षित, ई राजेश, शुभम, दीपक एवं प्रत्यूष उपाध्याय ने अपनी भूमिका से न्याय किया।

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इसके अलावा समारोह में 'देश के वर्तमान परिवेश में मुंशी प्रेमचंद्र के साहित्य की प्रासंगिकता' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पधारी राज्यमंत्री स्वाति सिंह ने कहा कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में मुंशी प्रेमचंद्र की स्मृति में कार्यक्रम किया जाना प्रदेश और देश में सांप्रदायिक सौहार्द्र बढ़ाने के लिए एक बेहद आवश्यक कदम हैं।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं महेंद्र मोदी, संस्कृति विभाग के निदेशक शिशिर, सी ई ओ पी एच डी चैंबर मुकेश बहादुर सिंह व वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना, गोपाल सिन्हा, अचला बोस, डॉ. के पी चंद्रा, ज्ञानेश्वर शर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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