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Mukhtar Ansari: हथियारों के शौकीन मुख्तार का अचूक था निशाना, पंजाब कनेक्शन से बेटे को बनाया अंतरराष्ट्रीय शूटर

Fri, 29 Mar 2024 07:35 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद पूरब के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक (कार्डिया अरेस्ट) से मौत हो गई। मुख्तार को मौत से करीब तीन घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां नौ डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। रात करीब साढ़े दस प्रशासन ने मुख्तार की मौत की सूचना सार्वजनिक की। 
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Mukhtar Ansari - फोटो : अमर उजाला
हथियारों के शौकीन मुख्तार अंसारी का निशाना अचूक था। उसने अपने बेटे अब्बास अंसारी को पंजाब कनेक्शन का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय शूटर बनाने में सफलता भी हासिल कर ली थी, हालांकि अनुमति के बिना अधिक संख्या में प्रतिबंधित असलहे खरीदने के मामले में एसटीएफ ने अब्बास पर कानूनी शिकंजा भी कसा गया। पंजाब से मुख्तार को अत्याधुनिक हथियार भी मिलते रहे। मुख्तार ने ही अपने करीबी लखनऊ निवासी जुगनू वालिया को भी पंजाब में पनाह दिलाई थी।
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Mukhtar Ansari - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2004 में मुख्तार पर सेना से चोरी हुई मशीन गन (एलएमजी) खरीदने का आरोप लगा, जिसने सूबे की सियासत में हड़कंप मचा दिया। मुख्तार पर कानूनी शिकंजा कस रहे एसटीएफ के तत्कालीन डिप्टी एसपी शैलेंद्र सिंह को इसका खुलासा करने की कीमत चुकानी पड़ी और अत्याधिक दबाव पड़ने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 

 
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Mukhtar Ansari Death - फोटो : अमर उजाला
इस मामले में मुख्तार पर पोटा लगाया गया था, जो उस दौर का सबसे सख्त कानून था। इस मशीन गन का इस्तेमाल विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के लिए होना था, जिसके लिए मुख्तार एक करोड़ रुपये दिए थे। एसटीएफ ने 25 जनवरी 2004 को वाराणसी के चौबेपुर इलाके में छापा मारकर एलएमजी बेचने आए बाबूलाल यादव और मुन्नर यादव को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एलएमजी और दो सौ कारतूस बरामद हुए थे।

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mukhtar ansari death - फोटो : अमर उजाला
हार्ट अटैक से माफिया मुख्तार अंसारी की मौत
करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद पूरब के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक (कार्डिया अरेस्ट) से मौत हो गई। मुख्तार को मौत से करीब तीन घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां नौ डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। रात करीब साढ़े दस प्रशासन ने मुख्तार की मौत की सूचना सार्वजनिक की। तब तक मुख्तार के परिवार का कोई सदस्य मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा था।
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मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे मुख्तार की जेल में तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी मौतके पर पहुंचे और करीब साढ़े आठ बजे के आसपास उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां दो घंटे तक उसका इलाज चला। उसे आईसीयू से सीसीयू में शिफ्ट किया गया। जहां रात साढ़े दस बजे के आसपास उसकी मौत हो गई।

 
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मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
तीन दिनों से बीमार चल रहे जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की तबीयत बृहस्पतिवार रात अचानक फिर बिगड़ गई। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, एसपी अंकुर अग्रवाल कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मंडलीय कारागार पहुंचे। करीब 40 मिनट तक अधिकारी जेल के भीतर रहे। इसके बाद मुख्तार को एंबुलेंस से दोबारा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। बताया जा रहा है कि मुख्तार को दिल का दौरा पड़ा है। रात में अस्पताल में उसका निधन हो गया।
 
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मुख्तार अंसारी। - फोटो : amar ujala
दो दिन पहले 26 मार्च को मुख्तार ने जेल प्रशासन से पेट में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने ज्यादा खाने (ओवरईटिंग) व कब्ज का इलाज किया गया और 14 घंटे बाद उसी दिन देर शाम उसे वापस मंडलीय कारागार भेज दिया गया था।

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mukhtar ansari - फोटो : फाइल फोटो
इधर, गुरुवार शाम साढ़े सात बजे के आसपास अचानक मुख्तार की तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने आनन-फानन उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। मुख्तार के स्थानीय अधिवक्ता नसीम हैदर ने बताया कि मुख्तार को हार्ट अटैक पड़ने की आशंका है।

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Mukhtar Ansari death - फोटो : सोशल मीडिया
प्रशासन उन्हें मुख्तार से मिलने नहीं दे रहा है। मुख्तार का परिवार भी बांदा के लिए लखनऊ से चल चुका है। इधर हालात बिगड़ने न पाए, इसके लिए जिले भर की पुलिस फोर्स को अलर्ट कर दिया गया है। जेल के भीतर भी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। देर रात तक डीएम और एसपी भी मेडिकल कॉलेज में मौजूद रहे और मुख्तार के सेहत की पल-पल की खबर लेते रहे।
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Mukhtar Ansari - फोटो : फाइल फोटो।
2005 के बाद जेल से नहीं निकल सका मुख्तार
अक्तूबर 2005 में मऊ में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान दंगे भड़के और मुख्तार को जेल जाना पड़ा। इसके बाद 29 नवंबर 2005 को भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या हुई और फिर बदलती सरकारों के साथ जेलें भी बदलती रहीं, लेकिन मुख्तार अंसारी बाहर नहीं आ सका।
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