प्रदेश की तीन कचहरियों लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के पीछे विवेचक ने महाराष्ट्र से लेकर गुजरात तक की तमाम वजहें गिनाई है। एक अहम कारण इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी वली उल्लाह की लखनऊ कचहरी में वकीलों द्वारा की गई पिटाई को भी बताया गया। 23 नवंबर 2007 को प्रदेश की तीन कचहरियों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में कई लोगों की जान गई थी। सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। इसकी विवेचना एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड को सौंपी गई थी। विवेचक एटीएस के उपाधीक्षक राजेश श्रीवास्तव को मिली विवेचना में ये बात सामने आई कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के मोहम्मद आसिफ उर्फ अब्दुल कदीर निवासी संजरपुर थाना सरायमीर जनपद आजमगढ़ ने पूछताछ में जो बताया उससे साफ है कि हूजी और इंडियन मुजाहिद्दीन ने मिलकर तीनों कचहरियों में बम धमाके करवाए।
विज्ञापन
2 of 5
तारिक काजमी
- फोटो : अमर उजाला
पूछताछ में साफ हुआ कि आसिफ के गांव का मोहम्मद सैफ वर्ष 2003 में उसके संपर्क में आया। मोहम्मद आसिफ द्वारा उसको जेहाद करने हेतु प्रेरित किया गया। जेहाद करने के कारण को स्पष्ट करते हुए मोहम्मद सैफ द्वारा बताया गया कि वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों को लेकर भी उकसाया गया था। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य उस समय इंडियन मुजाहिद्दीन का आतंकी वली उल्लाह नामक अभियुक्त की लखनऊ जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं द्वारा की गई पिटाई था। इसका बदला लेने के लिए मोहम्मद आसिफ उर्फ अब्दुल कदीर द्वारा 23 नवंबर 2007 को तीनों कचहरियों में सिलसिलेवार बम धमाकों को अंजाम दिए जाने के लिए कार्य योजना तैयार की गई। कार्य योजना तैयार करने के बाद इसे अमलीजामा भी पहनाया गया, जिसका परिणाम रहा कि एक ही दिन में तीन कचहरियों की न्यायिक व्यवस्था पूरी तरह से झकझोर दी गई। किसी ने अपना भाई खोया किसी ने पति और बेटा।
विज्ञापन
3 of 5
धमाकों के दोषी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस रिमांड में खोले थे मोहम्मद आरिफ ने राज
प्रदेश की तीनों कचहरियों मे बम विस्फोट की घटना को अंजाम दिए जाने का राज मोहम्मद आरिफ उर्फ अब्दुल कदीर ने एटीएस के सामने खोला था। पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मिले सबूत से घटना के आरोपियों को सजा दिलाने में सहायता मिली। एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड के पुलिस उपाधीक्षक राजेश श्रीवास्तव को इसने बताया कि मोहम्मद सैफ द्वारा उसे जेहाद में प्रशिक्षित करने हेतु पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई थी। इसमें विशेष रूप से अलकायदा के प्रशिक्षण सामग्री के माध्यम से मोहम्मद सैफ एवं आतिफ अमीन द्वारा उसको बम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। लैपटॉप पर भी आतिफ अमीन द्वारा इन विस्फोटों को इलेक्ट्रॉनिकली सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑपरेट करने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
4 of 5
फैसले के मद्देनजर तैनात एटीएस व जेल अधीक्षक
- फोटो : अमर उजाला
विवेचक को उसने यह भी बताया कि उसका संपर्क हूजी के सदस्यों तारिक कासमी ,खालिद मुजाहिद, सज्जाद उरहमान से किस प्रकार हुआ। 20 नवंबर 2007 को मोहम्मद सैफ द्वारा मुगलसराय रेलवे स्टेशन के बाहर उस से आधे घंटे दूर चलने पर एक स्थान में छह बमों को बनाने योग्य विस्फोटक पदार्थ, डेटोनेटर एवं टाइमर प्रदान किया गया, जिसमें से चार बमों को बनाने के पदार्थ उसकी सामग्री लेकर अन्य लोग खालिद मुजाहिद के घर मड़ियाहूं चले गए। यहां पर उन लोगों ने विस्फोटक पदार्थ डेटोनेटर एवं टाइमर संयुक्त आईडी तैयार किया जिसका प्रयोग फैजाबाद एवं वाराणसी में बम विस्फोट में किया गया।
शेष दोनों की सामग्री एवं डिटोनेटर टाइमर को लेकर मोहम्मद आरिफ लखनऊ आ गया, जहां उसकी मुलाकात आरिफ से हुई । उसके साथ 21 नवंबर 2007 को साहू सिनेमा के पास हुई आरिफ उर्फ जुनैद द्वारा लखनऊ न्यायालय परिसर में किए गए बम विस्फोट के लिए प्रयुक्त साइकिल को खरीदा गया। उसके सहयोग से ही सज्जादुरहमान एवं खालिद मुजाहिद के साथ लखनऊ न्यायालय परिसर में विस्फोट किया गया।