विमान अमौसी एयरपोर्ट पर उतरने को तैयार था। एटीसी से अनुमति मिल गई थी और रूट भी क्लीयर था। इसी दौरान विमान के लैंडिंग गियर खराब हो गए और वह रनवे से टकराकर हादसे का शिकार हो गया। विमान में आग भी लग गई। आनन-फानन एयरपोर्ट व जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए मोर्चा संभाला।
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मॉक ड्रिल
- फोटो : अमर उजाला
एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। आग बुझाई गई। घायलों को बाहर निकाला गया। अस्पताल भेजा गया। पैसेंजरों के परिवारीजनों को हिम्मत बंधाई गई। घबराइए मत। यह कोई विमान हादसा नहीं है। न ही अमौसी पर किसी विमान के लैंडिंग गियर सोमवार को खराब हुए और न ही पैसेंजरों को किसी प्रकार का नुकसान हुआ।
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मॉक ड्रिल
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दरअसल, यह एक मॉकड्रिल है। इस फुल स्केल फायर एक्सरसाइज को सोमवार को किया गया। एयरपोर्ट के विशेष कार्याधिकारी संजय नारायण ने बताया कि यह फायर एक्सरसाइज प्रतिमाह होती है, लेकिन फुल स्केल एक्सरसाइज दो साल में एक बार होती है।
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मॉक ड्रिल
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इसका उद्देश्य एयरपोर्ट पर विमान हादसा या आपातकालीन स्थितियों से निपटने में एयरपोर्ट प्रशासन, सुरक्षाबलों व जिला प्रशासन की तैयारियों को जांचना होता है। इस अभ्यास में सीआईएसएफ, जिला अस्पतालों, पुलिस, एयरलाइनों, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड को शामिल किया जाता है। एयरपोर्ट टर्मिनल पर पॉइंट बनाए जाते हैं, जहां से यात्रियों से जुड़ी जानकारियां उनके परिवारीजनों को दी जाती है।
इतना ही नहीं एटीसी से लेकर एयरलाइंस और एयरपोर्ट प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक का रिस्पॉन्स टाइम जांचा जाता है। चेक किया जाता है कि अमुक हादसे में अस्पतालों का रिस्पॉन्स कैसा रहा, एम्बुलेंस कितने समय में आईं, सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाने में क्या किया। सोमवार को हुई एक्सरसाइज सफल रही।