केंद्र सरकार ने वीआईपी कल्चर पर हथौड़ा क्या चलाया, यूपी के मंत्रियों में अपनी सरकारी गाड़ियों से लाल बत्ती उतारने की होड़ लग गई। बृहस्पतिवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ ही कई मंत्रियों ने खुद अपनी कार से लाल बत्ती उतार दी। ज्यादातर मंत्रियों ने इसकी फोटो सोशल मीडिया पर भी डाली। मंत्रियों का कहना है कि मोदी सरकार का फैसला बड़े बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है। लोकतंत्र में असली वीआईपी जनता ही है।
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मोदी सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर दिया है। इसके तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व मंत्रियों समेत किसी को भी लाल बत्ती लगाने का अधिकार नहीं रहेगा। आपातकालीन और राहत सेवाओं, एंबुलेंस, अग्निशमन सेवा से संबंधित वाहनों पर ही नीली बत्तियां लगाई जा सकेंगी। (लालबत्ती हटाते सत्यदेव पचौरी।)
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केंद्र सरकार का फैसला एक मई से प्रभावी होगा, लेकिन कैबिनेट की बैठक के तत्काल बाद ही सूबे में लाल बत्ती उतारने का सिलसिला शुरू हो गया। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बुधवार को ही लाल बत्ती उतार दी थी। बृहस्पतिवार को यह सिलसिला तेज हो गया। अधिकतर मंत्री बिना लाल बत्ती के वाहन से विधानभवन सचिवालय स्थित अपने दफ्तर पहुंचे। (रमापति शास्त्री लालबत्ती हटाते हुए।)
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गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा ने सुबह ही लाल बत्ती उतरवा दी। उन्होंने कहा कि जनता वीआईपी कल्चर को पसंद नहीं करती। अब जनता और उसके प्रतिनिधि के बीच लाल बत्ती नहीं आएगी। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, महिला कल्याण एवं पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, नगर विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन तथा खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी, समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री और पंचायती राज मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भूपेंद्र सिंह चौधरी ने भी अपने वाहनों से लाल बत्ती हटवा दी। (भूपेंद्र चौधरी लालबत्ती हटाते हुए।)
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लिफ्ट का इस्तेमाल भी छोड़ा
पशुधन एवं मत्स्य विकास मंत्री एसपी सिंह बघेल ने खुद अपनी कार से लालबत्ती उतारी और सचिवालय में लिफ्ट का इस्तेमाल भी छोड़ दिया। बघेल अपने विधानसभा क्षेत्र में पहले भी लाल बत्ती नहीं लगाते थे। (लालबत्ती हटाते एसपी सिंह बघेल।)
केजीएमयू के कुलपति ने गाड़ी से हटाई लाल बत्ती
केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने भी अपनी सरकारी गाड़ी से बृहस्पतिवार को ही लाल बत्ती हटा दी। कुलपति ने कहा कि यह पीएम का सराहनीय फैसला है। इससे जनता और वीआईपी के बीच की दूरी खत्म होगी। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा और उनके बीच काम करने वाला ही वीआईपी है।
सपा सरकार में खूब बंटी थी लाल बत्ती
सूबे में पिछली सपा सरकार में जमकर लाल बत्ती बंटी थी। परिवहन विभाग के मुताबिक 16 विभागों को एक साथ लालबत्ती बांटी गई थी। ऐसे विभागों के जुड़े अफ सरों को भी लाल बत्ती लगाने की छूट दी गई थी, जिनका न तो आपातकालीन सेवा से कोई लेना-देना था और न ही उन्हें इसकी जरूरत थी। रुतबा दिखाने के लिए इन अफ सरों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से गुहार करके लाल बत्ती हासिल कर ली थी।
परिवहन आयुक्त के रविंद्र नायक का कहना है कि लाल बत्ती के उपयोग के लिए सभी फैसला शासन लेता है। सपा सरकार में अध्यक्ष राजस्व परिषद, औद्योगिक विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त और सभी प्रमुख सचिव एवं सचिव, यूपी के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति, प्रदेश के मंत्रीगण, नेता विरोधी दल विधान परिषद एवं विधानसभा को लालबत्ती लगाने की अनुमति मिली थी। (लालबत्ती हटाते उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य।)