लखनऊ पुलिस से अब अपराधियों का बच पाना आसान नहीं होगा। वारदात के कुछ घंटो में ही बदमाश सलाखों के पीछे होंगे। इसके लिए पुलिस प्रमुख चौराहों पर ऑन स्पॉट क्रिमिनल ट्रैकर नाम की डिवाइस लगाने जा रही है। डिवाइस की खास बात यह है कि कोई भी पीड़ित फोन करेगा तो हूटर बजने लगेगा। इसके बाद उसके द्वारा मोबाइल दिया गया संदेश प्रसारित होगा।
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डीआईजी प्रवीण कुमार और एसएसपी मंजिल सैनी
- फोटो : amar ujala
यह संदेश चौराहे पर लगे हूटर कम साउंड पर तो प्रसारित होगा। साथ ही पुलिस के कंट्रोल रूम और मोबाइल वाहनों पर भी प्रसारित होगा। ताकि संदेश मिलते ही वारदात स्थल के आसपास मौजूद पुलिस टीम हरकत में आए और बदमाश को दबोच ले। इस डिवाइस का परीक्षण बृहस्पतिवार को गोमती नगर के पत्रकारपुरम चौराहे पर डीआईजी और एसएसपी ने किया। डिवाइस का निर्माण अवनी कुमार शुक्ला उर्फ जीतू ने किया है।
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डीआईजी प्रवीण कुमार और एसएसपी मंजिल सैनी
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पत्रकारपुरम चौराहे पर शाम चार बजे डीआईजी प्रवीण कुमार और एसएसपी मंजिल सैनी डिवाइस की जांच करने पहुंचे। अवनी कुमार ने अपना मोबाइल एसएसपी मंजिल सैनी को दिया। उन्होंने मोबाइल से पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर पर कॉल की। घंटी बजते ही चौराहे पर लगा हूटर बजने लगा। इसके बाद एसएसपी ने नो पार्क़िग में खड़े वाहनों को हटाने का संदेश दिया। जो हूटर कम साउंड से प्रसारित होने लगा। इसके बाद उन्होंने घर को चोरों से सुरक्षित रखने वाले डिवाइस का परीक्षण किया।
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डीआईजी प्रवीण कुमार और एसएसपी मंजिल सैनी
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एक वाईफाई बॉक्स घर के पत्रकापुरम चौकी के अंदर लगाया गया था। जैसे ही एसएसपी ने दरवाजा खोला तो डिवाइस से सायरन बजने लगा। इस दौरान सायरन बंद करने के लिए कुछ लोगों ने तार खींचकर अलग कर दिया। सायरन तो बंद हो गया। लेकिन मोबाइल पर हर पांच मिनट पर कॉल आने लगी। डीआईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि ऑन स्पॉट क्रिमिनल ट्रैकर डिवाइस गोमती नगर और गाजीपुर सर्किल में डिवाइस लगाया जाएगा। इस डिवाइस के जरिए अपराध कम होने लगेंगे तो इसे सभी थानाक्षेत्र में लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिवाइस का प्रदर्शन देखने के बाद ही इसे विभागीय स्तर पर लगाने की संस्तुति की जाएगी।
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अवनी कुमार ने बताया कि ऑन स्पॉट क्रिमिनल ट्रैकर डिवाइस अभी एक किलोमीटर के दायरे में ही काम करेगी। इसका दायरा पांच किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इस परिधि के बाद दूसरे डिवाइस का प्रयोग करना होगा। एक किलोमीटर तक काम करने वाले डिवाइस के निर्माण पर डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे। पांच किलोमीटर तक के रेंज वाले डिवाइस के लिए पांच लाख रुपये खर्च करने होंगे।
डीआईजी प्रवीण कुमार और एसएसपी मंजिल सैनी
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अवनी ने बताया कि डिवाइस लगाने के बाद इसे एक कंट्रोल रूम से अटैच कर दिया जाएगा। जहां पर तैनात कर्मचारी घटनास्थल से लेकर अपराधी के पकड़े जाने तक की प्रक्रिया पर नजर रख सकता है। वहीं, इस पर आने वाली हर कॉल और कार्रवाई की डिटेल अधिकारियों के मोबाइल पर भी आएगी। इससे वह लगातार संबंधित थाने की पुलिस की मॉनिटरिंग कर सकते हैं।