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शाबाश! बेटियों... दीक्षांत समारोह में 84% मेडल किए अपने नाम, डिग्रियां लेने में भी आगे

Sun, 10 Dec 2017 01:36 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ विश्वविद्यालय दीक्षांत में बेटियां फिर सिरमौर बनीं और 84 फीसदी मेडल अपने नाम कर डाले। इतना ही नहीं डिग्रियां हासिल करने में भी उन्होंने छात्रों को पीछे छोड़ दिया। मंच पर मेडल लेने पहुंची बेटियों को देख उनके माता-पिता और शिक्षकों की आंखों की चमक बता रही थी कि ऐसी बेटियों को पाकर वे धन्य हो गए। चक्रवर्ती और चांसलर गोल्ड मेडल को छोड़कर बाकी सभी प्रतिष्ठित मेडल छात्राओं को मिले। मेडल लेने के बाद शीर्ष पर रहीं छात्राओं ने ‘अमर उजाला’ से साझा की अपनी खुशी।
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शिक्षक बन समाज को कुछ देने का सपना: आयुषी
लड़का हुआ तो इंजीनियर, बेटी हुई तो डॉक्टर...इस मिथक तो तोड़ सबसे ज्यादा 12 मेडल हासिल करने वाली छात्रा बनी आयुषी कपूर। बायो और मैथ्स दोनों में अच्छे नंबर हासिल किये थे, पर मैथ्स में आगे पढ़ाई करने का इरादा किया। लेकिन उन्होंने मैथ्स को चुना और 12 मेडल हासिल किए। उनके अनुसार पीएचडी के बाद मेरा सपना शिक्षक बनने का है। आयुषी के पिता आरपी कपूर की स्टेशनरी की दुकान हैं। मां रीना कपूर गृहिणी हैं।
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जज बनकर बनाना है नया कीर्तिमान: आशा तिवारी
दीक्षांत समारोह में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा मेडल (9) हासिल करने वाली आशा तिवारी ने बताया कि उनका सपना वकालत करना और फिर जज बनना है। हालांकि राजनीति के प्रति उनका नजरिया भी सकारात्मक है। आशा शिया पीजी कॉलेज की छात्रा हैं। पहली बार ऐसा है कि किसी कॉलेज की एक छात्रा ने इतने ज्यादा मेडल हासिल किए हैं। आशा के पिता राजेश कुमार तिवारी में पीजीआई में कार्यरत हैं, मां शशी तिवारी गृहिणी हैं।

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अफसर बन पूरा करूंगी पिता का सपना: अंकिता
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में जौनपुर के एक किसान की बेटी अंकिता ने छह मेडल हासिल किये हैं। अंकिता के पिता मनोज पाल संत कबीर नगर में किसान और मां चंचल पाल गृहिणी हैं। वह आईएएस अफसर बनकर पिता का सपना पूरा करना चाहती हैं। ये मेडल उसे एमए राजनीति विज्ञान में टॉप करने पर मिले हैं। आईएएस की तैयारी के लिए अंकिता एमए के बाद इलाहाबाद में रह रही हैं। उसके अनुसार लखनऊ में रहकर उसका मकसद सिर्फ पढ़ाई करना और नंबर पाना ही था।
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हर कोई पढ़े आगे बढ़े, कुछ ऐसा करूंगी: गुलशन जहां
एमए एआईएच विभाग में टॉप करके छह मेडल हासिल करने वाली गुलशन के पिता मो.इस्लाम की एक छोटी सी बर्तन की दुकान है। उनके तीनों भाई दुकान और प्राइवेट जॉब करते हैं। बेटे घर का खर्च चलाने में सहयोग करते हैं, लेकिन बेटी गुलशन जहां ने पूरे शहर में उनका सिर फक्र से ऊंचा कर दिया। एमए में छह मेडल हासिल करने वाली गुलशन शिक्षक बनना चाहती हैं ताकि वो समाज को भी शिक्षित कर सकें।
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