बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि संसद के बजट सत्र के मौके पर राष्ट्रपति का संसद के संयुक्त अधिवेशन में दिया गया संबोधन मोदी सरकार की नीरसता का प्रतीक है। केंद्र सरकार देश के गरीबों, मजदूरों, बेरोजगारों व मध्यमवर्गीय लोगों के जीवन में नई उम्मीदें पैदा करने में विफल साबित हुई है।
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बसपा अध्यक्ष ने यहां जारी एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति का संबोधन वास्तव में केंद्र सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों का दस्तावेज होता है। इससे देशवासियों की काफी उम्मीदें जुड़ी होती हैं। पर, उनके संबोधन में भी सरकार की वही पुरानी घिसी-पिटी बातें सुनने को मिली हैं। इससे देश की आमजनता का कुछ खास भला न होकर सिर्फ पूंजीपतियों व धन्नासेठों का ही भला होता आया है।
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मायावती ने कहा, नोटबंदी के बारे में भी कुछ ठोस न बताकर पुराना राग सुनाया गया है। यह अच्छे दिन की तरह ही एक बहकावे जैसा है।
रेल व आम बजट को मिलाकर पेश करने और बजट का समय एक माह पहले करने की नई परपंरा शुरू की गई है। मगर, इसका असली फायदा क्या होगा, इस बारे में केंद्र सरकार आश्वस्त नहीं कर पा रही है।