कुछ दिनों से बीमार चल रहे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक (83) का मंगलवार रात करीब 10 बजे निधन हो गया। उन्होंने एरा मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। उन्हें सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके बेटे कल्बे सिब्तैन नूरी ने निधन की सूचना देते हुए कहा कि वह हम सबको यतीम करके चले गए। हिंदू-मुस्लिम एकता और शिया-सुन्नी एकता के प्रबल समर्थक रहे सादिक की सादगी से विरोधी भी उनके कायल थे। वह वैज्ञानिक गणना के आधार पर काफी पहले ही बता देते थे कि ईद का चांद कब दिखेगा।
विज्ञान की मदद से एक महीने पहले कर देते थे ईद के चांद की भविष्यवाणी
ईद के चांद को लेकर अक्सर विवाद पैदा होता रहता था जिसकी वजह से कई बार ऐसा भी हुआ जब दो-दो दिन ईद की नमाज हुई। इस विवाद को खत्म करने के लिए मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने विज्ञान का सहारा लिया।
उन्होंने सॉफ्टवेयर व अन्य वैज्ञानिक तरीकों से रमजान का महीना शुरू होते ही ईद की तारीख का भी एलान कर देते थे और बता देते थे कि ईद का चांद किस दिन होगा। दूसरे मसलक के लोगों ने इस पर एतराज भी जताया। कल्बे सादिक का कहना था कि दुनिया चांद पर पहुंच चुकी है और मुसलमान चांद की तारीख को लेकर झगड़ा कर रहा है। हमें विज्ञान और तकनीक का सहारा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
पैमाना भर चुका है छलकने की देर है...
पिछले साल एक इंटरव्यू में मौलाना की तबीयत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मशहूर मर्सिया निगार मीर अनीस की मिसाल देते हुए कहा कि मीर अनीस काफी बीमार थे, मिर्जा दबीर ने अनीस से शायराना अंदाज में पूछा कि कहिए मिजाज आपके अब तो बखैऱ हैं? मीर अनीस ने जवाब दिया पैमाना भर चुका है, छलकने की देर है...। वही हाल अब मेरा है। अब मौत का इंतजार कर रहे हैं बस।
निकाह के लिए मेहर की रकम दे दी जाए
बताते हैं कि हकीम-ए-उन्मत आमतौर पर निकाह पढ़ाने से परहेज करते थे। अगर कहीं पढ़ाने जाना भी पड़ा तो उनकी शर्त होती थी कि निकाह के पहले ही लड़के वाले मेहर की रकम दुल्हन को अदा कर दें। इसके बिना वो निकाह नहीं पढ़वाते थे।
बेटियों की पढ़ाई के हिमायती
डॉ. साहब हमेशा कहा करते थे कि जिस समाज की बेटियां अनपढ़ हो वो उस समाज के लिए तरक्की कर पाना मुमकिन नहीं है। ताउम्र वे बेटियों को तालीम दिलाने के लिए प्रयास करते रहे। पूरे प्रदेश में तमाम गर्ल्स स्कूल उनके सहयोग व मार्ग दर्शन में खुले। गरीब बच्चियों को तालीम देने के लिए तमाम स्कालरशिप वे देते थे।