यदि आप अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ले के अड़गड़ा चौराहे पर जाएंगे तो एक आलीशान मस्जिद बरबस ही आपको अपनी ओर आकर्षित करती नजर आएगी। यह मस्जिद शाहजहां के बाद मुगल बादशाह बने शाह आलम द्वितीय (1728-1806) ने बनवाई थी। मस्जिद का नाम बादशाह ने अपने पिता आलमगिरी के नाम पर रखा। बाबरी विवाद में तमाम धर्मावलंबी सवाल उठाते हैं कि मस्जिद का नाम किसी के नाम से नहीं होता लेकिन यह भी अपने आपमें एक मिसाल है।
ऐसा नहीं है कि इस मस्जिद को लेकर विवाद नहीं हुआ। महंत ज्ञानदास बताते हैं कि 1803 में शाह आलम द्वितीय जिसे अली गौहर के नाम से भी जाना जाता था, की पूरी सल्तनत को ब्रिटिश साम्राज्य ने जीत लिया। हनुमानगढ़ी के महंतों ने अपनी जमीन वापस लेने का मुकदमा किया तब ब्रिटिश कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक इबादत होती रहेगी, जमीन वापस नहीं ले सकते। मगर 25 जुलाई 2016 को हनुमानगढ़ी को मौका मिला था जब नगर पालिका की ओर से बतौर भू-मालिक उनके नाम से नोटिस आया कि जर्जर भवन का तत्काल जीर्णोद्घार कराएं या ध्वस्तीकरण सुनिश्चित करें, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो वरना सारा उत्तरदायित्व बतौर मालिक ज्ञानदास का होगा।