लखनऊ विकास प्राधिकरण अब शहर के विकास कार्यों में निजी कंपनियों को शामिल करेगा। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर विकास कार्य कराने और निवेश के प्रस्ताव को सोमवार को एलडीए बोर्ड की बैठक में हरी झंडी मिल गई। निजी क्षेत्र के लिए माहौल बनाने के उद्देश्य से एलडीए अब व्यावसायिक संपत्तियों को फ्री-होल्ड आधार पर बेचेगा।
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एलडीए बोर्ड की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
बैठक में एलडीए के 2697.33 करोड़ रुपयेे के बजट को भी बोर्ड की मंजूरी मिल गई। मंडलायुक्त कार्यालय में सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में निजी सहभागिता (पीपीपी मॉडल) से काम कराने के लिए प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव में कहा गया कि इंवेस्टर्स समिट जैसे कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी निजी सहभागिता से काम कराने के लिए निर्देश दे चुके हैं। एलडीए की योजनाएं भी अहम होने की वजह से उनको निजी क्षेत्र की मदद से विकसित करना ठीक रहेगा।
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शान-ए-अवध
- फोटो : amar ujala
जरूरत क्यों : विशेषज्ञता का मिलेगा फायदा
प्रस्ताव में कहा गया कि शान-ए-अवध जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मॉल, कानपुर रोड योजना के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे काम विशेषज्ञ संस्थाओं के हैं। इसके बाद ही सही उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है।
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डेमो
विवादित आवासीय योजनाओं में विकास कराए जा सकेंगे
आवासीय योजनाएं जोकि लंबे समय से अर्जन के बाद भी विवादित हैं। उनका विकास निजी क्षेत्र के शामिल होने से ही बेहतर हो सकता है। बजट का संकट दूर होगा
विकास कार्यों में निजी क्षेत्र के शामिल करने से बजट का संकट भी दूर होगा। इससे योजनाएं तेजी से पूरी हो सकेंगी।
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डेमो
- फोटो : amar ujala
लागू कब से : बसंत कुंज और मोहान रोड योजना से शुरुआत
निजी क्षेत्र को शामिल करने की शुरुआत हरदोई रोड की बसंत कुंज और मोहान रोड योजना से होगी। भविष्य में एलडीए अपनी कमोबेश सभी परियोजनाओं का विकास निजी क्षेत्र के जरिए ही कराएगा। इन योजनाओं में भी होगा लागू
- शान-ए-अवध, सीजी सिटी
- बजट होटल, फैजाबाद रोड
- स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, कानपुर रोड
2697 करोड़ का बजट, 450 करोड़ रुपये देनदारी
वित्तीय वर्ष 2018-19 में 2697.33 करोड़ रुपये खर्च कर विकास के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। एलडीए के पिछले वित्तीय वर्ष के अवशेष के साथ आय 2697.33 करोड़ रुपये होनी है। 450 करोड़ रुपये की देनदारी चुकाने के साथ ही विकास कार्यों पर खर्च होगा।