एम्स द्वारा गुरुवार को घोषित एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा परिणाम में लखनऊ के छात्रों ने एक बार फिर अपनी मेधा से सफलता का परचम लहराया है। दिव्यांशु अग्रवाल ने ऑल इंडिया मेरिट में 116 रैंक हासिल की है। वहीं प्रखर अग्रवाल ने 183 रैंक और प्रणव प्रकाश ने 324वीं रैंक हासिल की है। लखनऊ के ये मेधावी मेडिकल क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहते हैं।
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प्रणव तिवारी
- फोटो : amar ujala
एमबीबीएस के बाद बनना है न्यूरो सर्जन
प्रणव प्रकाश तिवारी ने एम्स के ऑल इंडिया मेरिट में 324वीं रैंक प्राप्त की है। प्रणव प्रकाश ने पिछले महीने ही घोषित सीबीएसई 12वीं के परीक्षा परिणाम में 96.60 फीसदी के साथ सफलता पाई थी। रेड रोज स्कूल से इंटर करने वाले प्रणव ने कहा कि उन्होंने कंसंट्रेट होकर रोजाना पढ़ाई की। वे इसके लिए दसवीं से ही तैयारी में लग गए थे। प्रणव के पिता जय प्रकाश तिवारी बैंक में मैनेजर हैं और मां अर्चना तिवारी गृहिणी। प्रणव ने बताया कि वे न्यूरो सर्जन बनना चाहते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। दूसरे छात्रों को उनकी सलाह है कि वे स्कूल लेवल से ही बेसिक पर ध्यान दें।
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प्रखर अग्रवाल
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शुरू से ही डॉक्टर बनने की ठान ली
प्रखर अग्रवाल ने पहले ही अटेंप्ट में 183वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है। उन्होंने रेड रोज स्कूल, राजाजीपुरम में इसी इंटर में वर्ष 91.2 प्रतिशत के साथ सफलता हासिल की। प्रखर के पिता डॉ. पीके अग्रवाल होमियोपैथी के डॉक्टर हैं, जबकि मां कविता अग्रवाल गृहिणी हैं। प्रखर ने बताया कि उन्होंने शुरू से डॉक्टर बनने की ठान ली थी। इसके लिए उन्होंने कक्षा 11वीं से ही तैयारी शुरू कर दी थी। वे स्कूल के अलावा, कोचिंग में रेगुलर पढ़ाई साथ में घर में भी एक्स्ट्रा पढ़ाई करते थे। सेल्फ स्टडी उनकी सफलता का मूल मंत्र है। अपने माता पिता को सफलता का श्रेय देते हुए बताया कि दूसरे छात्र सीरियस होकर अपने लक्ष्य को साध लें तो सफलता पक्की है। वे न्यूरो सर्जन बनना चाहते हैं।
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दिव्यांशु अग्रवाल
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रोजाना सेल्फ स्टडी से मिली सफलता
दिव्यांशु अग्रवाल ने ऑल इंडिया मेरिट में 116वीं रैंक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। उन्होंने इसी वर्ष डीपीएस जानकीपुरम से 94.2 प्रतिशत के साथ इंटर पास किया है। दिव्यांशु के पिता डॉ. आशुतोष अग्रवाल और मां डॉ. सारिका अग्रवाल दोनों ही डॉक्टर हैं। दिव्यांशु ने बताया कि उन्होंने इसके लिए कक्षा 9वीं से तैयारी शुरू कर दी थी। सेल्फ स्टडी उनका सफलता का मूल मंत्र है। तैयारी के दौरान वे सोशल साइट से दूर रहे। स्कूल के अलावा कोचिंग में जो भी पढ़ाया जाता था उसकी घर पर आकर नोट्स तैयार कर पढ़ाई करते थे। उन्होंने दूसरे बच्चों को टिप्स देते हुए बताया कि वे रोजाना पढ़ाई करें और खूब अभ्यास करें। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पहले माता-पिता को बाद में शिक्षकों को दिया। माता और पिता दोनों ही डॉक्टर होने की वजह से उन्हें काफी मदद मिली।
रोजाना 12 से 13 घंटे तक की पढ़ाई
जिला कारागार के अस्पताल में फार्मासिस्ट पद पर तैनात दिनेश वर्मा के पुत्र अभिषेक वर्मा ने एमबीबीएस में दाखिले के लिए दी गई एम्स की परीक्षा में ओबीसी वर्ग में देश में 9वीं रैंक हासिल कर बाराबंकी का नाम रोशन किया है। सामान्य श्रेणी में अभिषेक की रैंक 72वीं है। वर्तमान समय में जेल कॉलोनी में रह रहे मूल रूप से उन्नाव जिले के भगवंतनगर धनकौली निवासी फार्मासिस्ट दिनेश वर्मा का अभिषेक इकलौता बेटा है। अभिषेक ने बताया कि वह नियमित रूप से 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई करता है।