लखनऊ में पूजा यादव हत्याकांड में विवेचक के एक और खेल का राजफाश हुआ है। दरअसल, पूजा की मौत की वजह सिर में चोट लगना था। तब भी विवेचक ने हादसे के पहलू पर विवेचना पूरी कर चार्जशीट लगा दी। साफ है कि विवेचक ने सुबूतों को दरकिनार किया। मकसद था हत्या को हादसा दिखाना। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी नजरअंदाज किया।
हैरानी है कि अब तक विवेचक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अभी भी अफसर जांच का हवाला दे रहे हैं। हादसे की एफआईआर दर्ज होने के बाद दरोगा महेश पाल ने केस की विवेचना की थी।
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मृतक पूजा यादव का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक पूजा के शरीर पर एक्सीडेंटल चोटें थीं, लेकिन मौत की वजह हेड इंजरी थी। जो हत्या की तरफ इशारा करता है। अंदेशा ये भी कि किसी चीज से मारकर उसको कार से टक्कर मारी गई। लेकिन, विवेचक ने इस पहलू पर तफ्तीश ही नहीं की थी।
आनन-फानन हादसे की धारा में चार्जशीट लगा दी थी। वहीं, पुलिस को पूजा के परिवार (मायके पक्ष) के किसी भी सदस्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसलिए उसकी तरफ से कोई पैरवी करने वाला नहीं था। विवेचक वही करते रहे जो आरोपी कहते गए।
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शादी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
- फोटो : अमर उजाला
बीमार बताया, लेकिन पैदल चलने की बात कही
पुलिस के मुताबिक जब दोबारा जांच शुरू हुई तो दस्तावेजों में हादसे का वक्त सुबह 5:32 बजे दर्ज था। जब पूजा के ससुर से पूछताछ हुई तो उसने कहा कि बेटी की तबीयत खराब थी। इसलिए वह बाराबंकी से चिनहट पहुंचे थे और उसको लेकर अस्पताल जा रहे थे। ये बात पुलिस के गले नहीं उतरी, क्योंकि जब कोई इतना बीमार था तो पूजा को पैदल क्यों ले जाया जा रहा था। हादसे का वक्त भी अजीब था। इसे भी शक गहराया था।
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आरोपी कुलदीप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
यह है पूरी घटना
चिनहट निवासी पूजा यादव की मौत 17 फरवरी 2023 को हुई थी। पति अभिषेक ने 20 मई 2023 को हादसे की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने उसी धारा में चार्जशीट भी लगा दी थी। जब पति ने 50 लाख के एक्सीडेंटल बीमा के क्लेम के लिए अप्लाई किया था तब बीमा कंपनी को शक हुआ था। शिकायत के बाद जब पुलिस ने दोबारा तफ्तीश की तब मंगलवार को खुलासा किया कि पति अभिषेक, ससुर राम मिलन ने परिचित रियल एस्टेट कारोबारी कुलदीप, आलोक निगम, दीपक वर्मा, अभिषेक शुक्ला ने मिलकर पूजा की हत्या की थी और उसको हादसे का रूप दिया था। तीन आरोपी जेल जा चुके हैं। पति, ससुर और अभिषेक शुक्ला की तलाश जारी है।
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आरोपी दीपक वर्मा
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पुराने शातिर हैं कुलदीप व दीपक, बेचवा लेते थे जमीन
लखनऊ में महिला का बीमा कराने के बाद उसकी हत्या को हादसे का रूप देकर बीमा का पैसा हड़पने की साजिश में शामिल बाराबंकी के दो युवक कुलदीप कुमार व दीपक वर्मा सालों से यहां नहीं रहते हैं। कुलदीप ने यहां रहते हुए कई फ्रॉड किए थे मगर उस पर केस नहीं दर्ज हुए। दोनों को लखनऊ पुलिस जेल भेज चुकी है। मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के सूरतगंज कस्बा निवासी दीपक वर्मा पांच साल पहले लखनऊ चला गया था। यहां भी उसका चाल-चलन ठीक नहीं था। छह साल पहले उसने अपने पिता की ट्रैक्टर-ट्रॉली गिरवी रख दी थी। घरवालों के विरोध के बाद वह लखनऊ चला गया।
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आरोपी आलोक निगम
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वहीं बसौली गांव का कुलदीप यहां चंटू के नाम से जाना जाता था। वह जमीन के कारोबार में दलाली करता था। उसने बुढ़ानापुर गांव के एक व्यक्ति को ट्रैक्टर खरीदवाने के बाद उसकी सारी जमीन बिकवा दी। कई अन्य फ्रॉड किए। करीब सात-आठ साल से कुलदीप लखनऊ में ही रह रहा है। उसके बसौली स्थित मकान पर कोई नहीं रहता। दीपक की माता का देहांत हो चुका है। उसके पिता की दूसरी शादी हुई है और वह सूरतगंज में रहकर वेल्डिंग का काम करते हैं।