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UP: डॉक्टर नहीं बनना चाहता था अक्षत, नीले ड्रम वाले कातिल बेटे का ये बिजनेस करने का था प्लान, पिता थे नाखुश

Wed, 25 Feb 2026 03:35 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी लैब संचालक मानवेंद्र सिंह की हत्या में एक और खुलासा हुआ है। मानवेंद्र सिंह बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन बेटा बिजनेस करना चाहता था। अक्षत के दोस्तों का कहना है कि हत्या के पीछे नीट निकालने का दबाव नहीं है। 
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Lucknow murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
यूपी की राजधानी लखनऊ में शराब कारोबारी और पैथॉलोजी लैब संचालक की हत्या के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि पिता और पुत्र के सपनों की दिशाएं पूरी तरह से अलग-अलग थीं। मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे। उन्होंने लखनऊ में अपना कारोबार जमाया। उनके पास चार पैथोलॉजी लैब और तीन शराब की लाइसेंसी दुकानें थीं। 

वर्ष 2017 में कारोबारी की पत्नी ने पारिवारिक कलह में जहर खाकर जान दे दी थी। पत्नी के मौत के बाद मानवेंद्र की दुनिया बेटे अक्षत और बेटी कृति तक सिमट गई थी। परिवार के लोगों ने बताया कि मानवेंद्र की सबसे बड़ी ख्वाहिश बेटे को डॉक्टर बनाने की थी। लेकिन अक्षत कारोबार करना चाहता था। 
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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के बाद गमगीन परिजन - फोटो : शुभम बंसल
अक्षत ने प्रतिष्ठित लामार्ट स्कूल से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने एक कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी की। उसने दो बार यह परीक्षा भी दी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी। 

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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के बाद आरोपी बेटे को घर लाती पुलिस - फोटो : शुभम बंसल
पिता की ख्वाहिश
पिता मानवेंद्र सिंह अपने बेटे अक्षत को डॉक्टर बनाना चाहते थे। यह उनकी जीवन की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण इच्छा थी। उन्होंने अक्षत की पढ़ाई और नीट की तैयारी पर पूरा ध्यान दिया। इसके लिए उन्होंने हर संभव संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए थे।

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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के बाद आरोपी बेटे को घर लाती पुलिस - फोटो : शुभम बंसल
बेटे की अलग राह
अक्षत डॉक्टर बनने के बजाय स्वयं को कारोबार की कमान संभालने लायक समझता था। वह रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसे नए व्यापार में हाथ आजमाना चाहता था। उसने अपने पिता से इस बारे में कई बार बात भी की थी। हालांकि, मानवेंद्र ने उसके इस व्यापारिक विचार को स्पष्ट रूप से मना कर दिया था।
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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता बेटे को देते थे 27 हजार रुपये वेतन
मानवेंद्र की चार पैथालॉजी और तीन शराब की दुकानें हैं। मानवेंद्र बेटे से सभी पैथोलॉजी सेंटर का संचालन करवाना चाहते थे। उन्होंने पारा स्थित वर्धमान पैथोलॉजी के संचालन का जिम्मा भी दे दिया था। इसके लिए वह बेटे को 27 हजार रुपये वेतन भी देते थे। अक्षत कॉलेज से आने के बाद पैथोलॉजी में जाकर बैठता था।
 
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शराब कारोबारी हत्या के बाद पुलिस को मौके पर लेकर जाता आरोपी बेटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अक्षत के दोस्तों का कहना है कि हत्या के पीछे नीट निकालने का दबाव नहीं है। किसी और वजह से उसने पिता की हत्या की है। डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, कई पहलुओं पर मामले की छानबीन की जा रही है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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आरोपी बेटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटे के खाते में जमा किए थे पांच लाख रुपये
तीन वर्ष पहले मानवेंद्र ने बेटे और बेटी के खाते में पांच-पांच लाख रुपये जमा किए थे। खाते में रकम आने के बाद अक्षत के खर्च बढ़ गए थे। वह ज्यादा रुपये उड़ाने लगा था। आदत में सुधार नहीं होने पर ही मानवेंद्र ने अक्षत को नौकरी कर कमाने की बात कही थी। अक्षत रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट का व्यापार करना चाहता था, लेकिन मानवेंद्र ने उसे मना कर दिया था।
 

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शराब कारोबारी हत्या के बाद मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह था मामला
लखनऊ के आशियाना के सेक्टर एल में रहने वाले शराब कारोबारी व पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की उन्हीं के बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) ने गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े कर दोनों हाथ व पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए। सिर सहित धड़ घर के भीतर ड्रम से बरामद किया गया है। पुलिस ने बेटे के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
 

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शराब कारोबारी के घर के बाहर जुटी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, 21 फरवरी को आशियाना थाने पर मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की शिकायत मिली थी। पुलिस ने सचिवालय सुरक्षा में तैनात मानवेंद्र के भाई अरविंद कुमार से मामले की जानकारी ली। इसके बाद अक्षत से पूछताछ की तो पता चला कि मानवेंद्र बेटे पर नीट परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे। 

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शराब कारोबारी हत्या के बाद घटनास्थल पर पहुंचे पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
20 फरवरी को सुबह 4:30 बजे इसी बात को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हो गया। गुस्से में आकर अक्षत ने पिता को लाइसेंसी राइफल से गोली मार दी। मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के वक्त अक्षत की छोटी बहन कृति अपने कमरे में सो रही थी। 

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शराब कारोबारी हत्या के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंची तो पिता का शव कमरे में पड़ा था। मानवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह सेवानिवृत्त दरोगा हैं। वह जालौन में रहते हैं। घटना की सूचना पर आशियाना पहुंचे। पुलिस ने कारोबारी के हाथ और पैर बरामद कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया है। 

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शराब कारोबारी की कार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हाथ-पैर फेंके, सिर सहित धड़ घर में ड्रम में मिला
वारदात मकान के तीसरे तल पर हुई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद वह शव को घसीटते हुए भूतल पर लाया। यहां खाली कमरे में शव रख दिया। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।

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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के बाद गमगीन परिजन - फोटो : शुभम बंसल
पहले कार में लादकर गोमती नदी में फेंकने की साजिश रची, लेकिन शव का वजन ज्यादा था। इससे वह अकेले ऐसा नहीं कर पाया। इसके बाद आरी खरीदकर लाया और पिता के शव के टुकड़े कर दिए। धड़ ठिकाने नहीं लगा सकने पर नीला ड्रम खरीदकर लाया और उसमें डाल दिया। इससे पहले कि अक्षत धड़ को ठिकाने लगाता उसकी करतूत उजागर हो गई।

 
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शराब कारोबारी हत्या के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बहन को घर में रखा बंद
अक्षत ने जब पिता की हत्या की तब छोटी बहन भागकर कमरे में पहुंची थी। लेकिन अक्षत ने जान से मारने की धमकी देकर उसे चुप करा दिया। उसे चार दिन तक घर में बंद करके रखा था। 
 
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