‘मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलना या सांसद डिंपल यादव से ट्रेन की चाबी लेना जिंदगी का एक महत्वपूर्ण क्षण था। लेकिन, इससे भी ज्यादा दिल को छूने वाला वह पल था जब ट्रेन के ट्रेक पर आने के बाद छतों से लोगों को हाथ हिलाकर स्वागत करते देखा। उनकी आंखों में जो खुशी थी, वह भावुक कर देने वाली थी। वह स्वागत, वह खुशी हमेशा याद रहेगी।’
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लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
यह लाइन उन दोनों महिला पायलटों के दिल से निकले वे शब्द हैं जोकि उन्होंने महसूस किए। शुक्रवार को मेट्रो भवन में मौजूद दोनों महिला पायलटों ने ट्रेन चलाने के समय अपने भावुक क्षणों को साझा किया। प्राची शर्मा का कहना था कि मुझे हमेशा याद रहेगा जब मैं ट्रेन लेकर ट्रेक पर ट्रांसपोर्टनगर से मवैया की तरफ जा रही थी।
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लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
ट्रेन की स्पीड उस समय 15-25 किमी. प्रति घंटा थी, लेकिन पूरे रास्ते लोगों का छतों पर खड़े होकर ट्रेन को देखकर खुश होना, उसकी फोटो खींचना, पायलटों को देखकर हाथ हिलाकर स्वागत करना। सब कुछ बहुत खास था। एक बारगी तो मुझे लगा कि मैं रो दूंगी।
कुछ यही शब्द प्रतिभा के भी थे। प्रतिभा का कहना था कि शाम को परिवार के लोगों से बात हुई। उनको पूरी बात बताई। सब बहुत खुश हैं कि उनकी बेटी को लखनऊ की पहली ही ट्रेन चलाने का मौका मिला। प्राची और प्रतिभा 97 कंट्रोलर कम ट्रेन ऑपरेटर के उस बैच का हिस्सा हैं, जिसमें 19 लड़कियां हैं। उनकी क्षमता की वजह से इन लड़कियों को चुना गया।